भिलाई-चरोदा निगम के गनियारी में रूरल इंजीनियरिंग पार्क बनाया जाएगा। यहां स्व सहायता समूह की महिलाएं अपने हाथों से सामान बना सकेंगी। इसमें चटाई, सकोरा, झाड़ू, धान की बाली से दीपावली के समय बनाए जाने वाले निशान यानी फाता, घड़ा, दीया, गमला, पैरदान, फिनाईल, मोमबत्ती, ऊन से बने रंगीन झालर, एलईडी बल्ब, व्रत, त्योहार और पर्व के अनुसार जरूरत की चीजें भी बनाई जाएंगी। गोबर की लकड़ी भी बनाई जाएगी। इसका उपयोग हवन आदि कार्यों में करने के साथ-साथ अंतिम संस्कार में भी किया जा सकेगा। कार्यक्रम में महापौर ने कहा कि गांवों की समृद्धि की पहचान गायों से है। मवेशियों के होने से फसल उत्पादन में वृद्धि संभव है।
महिलाओं को करेंगे स्वरोजगार के लिए प्रेरित
स्व सहायता समूह की महिलाएं चाहें तो सब्जी और फूल की खेती कर सकेंगी। गेंदे के फूलों का पैदावार ले सकेंगी। अलसी की फसल ले सकेंगी। इस तरह महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाएगा। उनके बनाए सामान के वितरण और विपणन दोनों की व्यवस्था यहां रहेगी। इससे महिलाओं को अपने काम का सही कीमत भी मिल सकेगा। उत्पादों को बेचने के लिए उन्हें किसी अन्य माध्यम की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
4 एकड़ में बने गौठान का किया गया उद्घाटन
गनियारी में 4 एकड़ में 25 लाख की लागत से बने गौठान का उद्घाटन हुआ। महापौर निर्मल कोसरे ने इसका उद्घाटन किया। इस अवसर पर दो क्विंटल गोबर की खरीदी की गई। इसके बाद यहां बने डबरी, कोटना, पानी की व्यवस्था, शेड, चारागाह आदि का निरीक्षण किया। गायों की पूजा की और चारा खिलाया। कार्यक्रम में आयुक्त कीर्तिमान सिंह राठौर, अश्विनी चंद्राकर, धर्मेंद्र कोसरे, अशफाक अहमद आदि उपस्थित थे।

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