150 लोग हिरासत में, पूछताछ जारी, सीएम साय ने रद्द किया जशपुर दौरा...
त्वरित ख़बरें -सत्यभामा दुर्गा रिपोर्टिंग

 रायपुर. छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार में 10 जून को हुए बलवाकांड में सरकार सख्त एक्शन ले रही है. जिला प्रशासन और पुलिस सीसीटीवी फूटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर रही है. पुलिस ने अभी तक इस मामले में 70 लोगों से पूछताछ की है और 150 लोगों को हिरासत में लिया है. इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 11 जून को जशपुर दौरा रद्द कर रायपुर में आला अधिकारियों की बैठक ली. इस बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, डिप्टी सीएम अरुण साव और आला अधिकारी मौजूद थे. बता दें, 10 जून को सतनामी समाज ने शहर में उग्र आंदोलन किया. आंदोलनकारियों ने कलेक्ट्रेट, एसपी ऑफिस में तोड़फोड़ और आगजनी की.बलौदा बाजार कलेक्टर केएल चौहान ने कहा कि संदेहियों से लगातार पूछताछ की जा रही है. हम इस मामले में गिरफ्तारियां भी कर रहे हैं. पीडब्ल्यूडी विभाग इस आगजनी में हुए नुकसान का आंकलन कर रहा है. सभी दस्तावेजों की लिस्टिंग की जा रही है. वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है. इस प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है. चौहान ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने कहा था कि सिर्फ सभा करेंगे और सरकार को धन्यवाद ज्ञापित करेंगे. हमारे पास जो इनपुट था उसके हिसाब से ही हमने फोर्स लगाई थी.दूसरी ओर, इस घटना को लेकर डीएसपी और एसडीएम ने सभी समाज प्रमुखों के साथ शांति बैठक की. उन्होंने सभी से शहर में शांति बनाए रखने की अपील की. इसके साथ ही कलेक्टर कार्यालय की भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. यहां भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और निजी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है.वहीं, इस घटना में घायल पुलिस जवान संदीप खलको को बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है. आईजी संजीव शुक्ला, कलेक्टर अवनीश शरण और एसपी रजनेश सिंह उनका हालचाल जानने अस्पताल पहुंचे. बता दें, संदीप को जबड़े और आंख में गंभीर चोट आई है. अधिकारियों ने अपोलो प्रबंधन को जवान का बेहरत इलाज करने के निर्देश दिए हैं.इस हिंसा को लेकर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा है कि प्रदेश में पहली बार इतनी बड़ी घटना हुई है. राज्य सरकार इस पर कोई ध्यान नही दे रही. प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर ठीक नहीं. राज्यपाल और राष्ट्रपति को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए. कलेक्टर-एसपी की गाड़ी जली है. इस मामले में लीपापोती करने की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी लेने की बात है. प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की चीज नहीं है. डिप्टी सीएम करने क्या गए थे. वे जिम्मेदारी खुद लें. बीजेपी से सत्ता संभल नहीं रही. यह भूल चूक नहीं, लापरवाही है. सैकड़ों वाहन जला दिए गए. कलेक्ट्रेट जला दिया गया. शासन-प्रशासन नाम की चीज छत्तीसगढ़ में नहीं बची.


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