लखनऊ, में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। जिस इमारत में आग लगी, उसे करीब 10 वर्ष पहले ही अवैध घोषित कर दिया गया था। वर्ष 2016 में संबंधित अधिकारियों ने भवन को गिराने का आदेश भी जारी किया था, लेकिन आदेश पर अमल नहीं होने के कारण इमारत वर्षों तक खड़ी रही।
हादसे के बाद प्रशासनिक लापरवाही को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भवन निर्माण और सुरक्षा मानकों से जुड़ी कई गंभीर अनियमितताएं थीं। मामले में कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
सरकार ने हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। जांच टीम यह पता लगाएगी कि गिराने के आदेश के बावजूद भवन को क्यों नहीं हटाया गया और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर अवैध निर्माण और प्रशासनिक उदासीनता के मुद्दे को सामने ला दिया है। मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।