छत्तीसगढ़ में सट्टेबाजी का पारंपरिक तरीका तेजी से बदल रहा है। पहले जहां यह अवैध कारोबार पर्चियों और स्थानीय बुकियों के जरिए संचालित होता था, वहीं अब यह पूरी तरह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहा है। मोबाइल फोन और इंटरनेट के जरिए सट्टे का नेटवर्क अब कई शहरों और गांवों तक फैल चुका है।
सूत्रों के अनुसार, सट्टा खेलने के लिए अब लोगों को सिर्फ एक ऑनलाइन पैनल या आईडी की जरूरत होती है, जो करीब 2500 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है। इस पैनल के जरिए खिलाड़ी किसी भी समय मोबाइल या कंप्यूटर से लॉगिन कर सट्टा लगा सकते हैं। सट्टे की जीत-हार और लेन-देन का पूरा हिसाब भी डिजिटल तरीके से किया जा रहा है।
जांच में यह भी सामने आया है कि “डायमंड 7777 बुक” नाम से संचालित एक ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म का नेटवर्क दुर्ग जिले से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से कई एजेंट और सब-एजेंट लोगों को जोड़कर सट्टा खिलाने का काम कर रहे हैं।
सट्टा कारोबार में अब एक संगठित ढांचा बन चुका है। इसमें मास्टर एजेंट, एजेंट और लोकल ऑपरेटर की अलग-अलग जिम्मेदारी होती है। मास्टर एजेंट के पास कई पैनल होते हैं, जिन्हें वह छोटे एजेंटों को देता है। छोटे एजेंट अपने क्षेत्र में खिलाड़ियों को जोड़ते हैं और उन्हें सट्टा खेलने के लिए आईडी उपलब्ध कराते हैं।
पुलिस और खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि इस ऑनलाइन सिस्टम के जरिए रोजाना लाखों रुपये का अवैध लेन-देन हो रहा है। तकनीक के उपयोग के कारण सट्टेबाजों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो गया है, लेकिन साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की मदद से इस नेटवर्क के मुख्य संचालकों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि इस ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क पर समय रहते लगाम नहीं लगाई गई, तो यह और भी बड़े पैमाने पर फैल सकता है। इसलिए अब पुलिस डिजिटल ट्रांजेक्शन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की भी निगरानी कर रही है, ताकि इस अवैध कारोबार में शामिल लोगों पर कार्रवाई की जा सके।