स्वावलंबन की ओर बढ़ता हर कदम, गाँव की महिलाओं को मिलेगा नया दम!

त्वरित खबरें राहुल ओझा ब्यूरो प्रमुख रिर्पोटिंग

स्वावलंबन की ओर बढ़ता हर कदम, गाँव की महिलाओं को मिलेगा नया दम! 

*सीखेंगी, कमाएंगी, आत्मनिर्भर बन जाएंगी!*

*जहाँ महिला सशक्त, वहाँ गांव समृद्ध!*

*स्वावलंबी भारत की नींव—स्वावलंबी महिलाएं!*

*स्वावलंबी भारत अभियान के तहत ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार प्रशिक्षण*

जिला राजनांदगांव (मगरलोटा ब्लॉक टेदेसरा , सोमनी) - भारत अभियान के प्रांत सह समन्वयक श्री संजय चौबे ने जानकारी दी कि अभियान के अंतर्गत ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।  इसी क्रम में राजनांदगांव जिले के ग्राम मगरलोटा स्थित सामुदायिक भवन में महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। 

प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्री संतोष जैन अपनी टोली के साथ विशेष रूप से उपस्थित रहे।  उन्होंने बताया कि काम की कमी नहीं होने दी जाएगी और समय-समय पर इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाएगा। 

इस अवसर पर ग्राम पंचायत के पंच  राजेश यादव सहित अन्य पंचगण एवं स्थानीय ग्रामीणजनों की भी सक्रिय सहभागिता रही। 

प्रांत सह समन्वयक श्री संजय चौबे ने आगे बताया कि इसी प्रकार आसपास के गांवों—जैसे मुढ़ीपार, कोपेडीह, बीरेझर, नवागांव, घिरी आदि—में भी महिलाओं के स्वावलंबन की दिशा में योजनाबद्ध रूप से कार्य किया जाएगा। 

इसी तारतम्य में स्वावलंबी भारत अभियान के प्रांत सह समन्वयक संजय चौबे ने बताया कि स्वावलंबन से ग्रामीण महिलाओं को होने वाले प्रमुख लाभ निम्न है।

आर्थिक स्वतंत्रता और आय के स्रोत:

प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर मिलने से महिलाएं अपनी आय स्वयं अर्जित कर सकती हैं, जिससे वे परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना सकती हैं।

 सामाजिक सम्मान और आत्मविश्वास में वृद्धि:

आत्मनिर्भर बनने से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है और समाज में उनका सम्मान भी बढ़ता है।

शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार:

आर्थिक सशक्तिकरण से महिलाएं अपने और अपने परिवार के लिए बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित कर सकती हैं।

 निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि:

आर्थिक रूप से स्वतंत्र महिलाएं परिवार और समाज में महत्वपूर्ण निर्णय लेने में सक्षम होती हैं।

 सामूहिक विकास और नेतृत्व

स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं सामूहिक रूप से कार्य करती हैं, जिससे नेतृत्व कौशल विकसित होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

स्वावलंबी भारत अभियान का उद्देश्य हर गांव की महिला को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना एवं स्थानीय संसाधनों के माध्यम से उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।