"प्रकृति, संस्कृति, पर्यावरण,जनसंख्या वृद्धि और बदलते मानवीय संस्कार" विषय पर वक्ता के तौर पर शामिल हुए आचार्य शर्मा
भिलाई। " भारत एक ऋषि प्रधान और कृषि प्रधान राष्ट्र के रूप में पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। जल वर्षा से हरी-हरी खेती वाला हमारा देश पूरी दुनिया में ज्ञान -विज्ञान वर्षा करके अपने भारतवर्ष इस नाम को सार्थक कर रहा है।
वैदिक शांति पाठ और स्नान मन्त्र के साथ-साथ समूचा भारतीय साहित्य और हमारी संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण और संतुलन के विचार और व्यवहार सुलभ हैं। पक्षी के शिकारी को दिये अभिशाप से शुरू रामायण में वाल्मीकि जी ने वन-उपवन की अनन्त छटाएँ बिखेरीं हैं। महाराज दिलीप की नंदिनी गौ सेवा के निशान उसके खुरों के निशानों के रूप में शिवनाथ के तट पर देखे गये। नन्दिनी नाम से छत्तीसगढ़ में आज भी अनेक स्थान हैं।" ये विचार हैं भारतीय साहित्य संस्कृति मर्मज्ञ आचार्य डॉ.महेश चन्द्र शर्मा के। देश-विदेश के सफल शैक्षणिक भ्रमण कर चुके आचार्य डॉ.शर्मा विगत दिनों मैक्स कालेज रायपुर में " प्रकृति, संस्कृति, पर्यावरण,जनसंख्या वृद्धि और बदलते मानवीय संस्कार " विषय पर विशेष आमन्त्रित विशेषज्ञ वक्तव्य दे रहे थे।
महाराजा अग्रसेन अन्तर्राष्ट्रीय महाविद्यालय में दुर्ग-भिलाई समेत प्रायः पूरे छत्तीसगढ़ से आये हजारों विद्यार्थियों और शिक्षकों को सम्बोधित कर रहे थे। बड़ी संख्या में इस विषय पर विविध प्रतियोगिताओं में विजयी विद्यार्थियों को भी पुरस्कृत किया गया। डॉ.शर्मा ने आगे बताया कि एक वृक्ष दस बेटों के समान होता है। सौ कौरवों के लिये पांच पाण्डव काफी हैं, क्योंकि उनके साथ वेद पुरुष योगेश्वर श्रीकृष्ण जी हैं। उल्लेखनीय है कि डॉ. महेश चन्द्र शर्मा ने कुछ वर्षों पूर्व इटली में " कालिदास और पर्यावरण" शोध लेख पढ़कर विश्व ख्याति प्राप्त की। प्राध्यापक और प्राचार्य रहते हुए पांच दशकों तक भारतीय पर्यावरण का लोकप्रिय पठन-पाठन किया। मैक्स कॉलेज के इस कार्यक्रम में आई.टी. कालेज जमशेदपुर के पूर्व प्रो. डॉ. रणजीत प्रसाद एवं भुवनेश्वर के पर्यावरणविद् डॉ.अनिल कुमार ने भी अच्छा मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व मुख्य सचिव सुयोग्य कुमार मिश्र ने की। पर्यावरण ऊर्जा टाइम्स, रायपुर के संपादक ललित सिंघानिया, प्रेस क्लब रायपुर के अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर, रोटरी क्लब रायपुर ईस्ट के अध्यक्ष डॉ.ऋषि अग्रवाल (आरोग्य हास्पीटल), रणवीर राम नायक एवं उत्तम सिंह गहरवार आदि का समारोह को सफल बनाने में विशेष योगदान रहा।