दुर्ग, 20 सितंबर 2022,
पोषण माह के दौरान बच्चों, गर्भवती महिलाओं व शिशुवती माताओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जिले के आंगनवाड़ी केंद्रों में जहां विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर लोगों को सुपोषण का संदेश दिया जा रहा है; वहीं कृषि विज्ञान केंद्र अंजोरा में राष्ट्रीय पोषण अभियान एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बेहतर पोषण के लिए पोषण वाटिका की महत्ता बताते हुए विशेषकर महिला कृषकों एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से वाटिका में मुनगा, पपीता एवं केला पेड़ लगाने का संकल्प लेने की अपील की गई। साथ ही जागरुकता कार्यक्रम अवसर पर जिले की 105 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं कृषक महिलाओं को इफको के सहयोग से मौसमी सब्जियों के बीज पैकेट का वितरण किया गया।
पोषण माह के दौरानआंगनवाड़ी केंद्रों में लाभार्थियों को पोषण किट व बच्चों को गुड़-चना, चिक्की और टाफियां बांटी जा रही है। पौष्टिक व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई जा रही है। साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा पोषण किट में सम्मिलित पौष्टिक खाद्य पदार्थों के नियमित सेवन तथा उनके महत्व के विषय में लाभार्थियों को व्यापक जानकारी दी जा रही है ताकि बच्चों में कुपोषण तथा महिलाओं में एनीमिया या प्रोटीन की कमी को दूर किया जा सके। कृषि विज्ञान केंद्र अंजोरा में आयोजित राष्ट्रीय पोषण अभियान एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दाऊ वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय,दुर्ग के कुलपति डॉ. एन.पी. दक्षिणकर (कर्नल) थे। विस्तार शिक्षा के निदेशक डॉ.संजय शाक्य ने अध्यक्षता की। वहीं ग्राम पंचायत अंजोरा की सरपंच संगीता साहू एवं राज्य विपणन प्रबंधक, रायपुर आर.एस. तिवारी विशिष्ट अतिथि थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. एन.पी. दक्षिणकर ने कहाः “पोषण के स्तर एवं परिवार की आर्थिक स्थिति का सीधा संबंध है, इसे गंभीरता से लेते हुए गुजरे पांच वर्ष से ‘सुपोषित भारत अभियान’ कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। परिवार के बेहतर पोषण के लिए वर्ष भर सब्जी-भाजी एवं मौसमी फलों का सेवन करना चाहिए। इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बाड़ी में पोषण वाटिका को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। विशेषकर महिला कृषकों एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को वाटिका में मुनगा, पपीता एवं केला पेड़ लगाने का संकल्प लेना चाहिए। यदि बाड़ी नहीं हो तो अपने घर की छत पर बेकार पड़े डिब्बे या बाल्टियों का उपयोग कर सब्जी-भाजी का उत्पादन किया जा सकता है। साथ ही डबरी में जहां पानी जमा रहता है, वहां देसी छोटी मछलियों का पालन किया जाए तो इनके सेवन से सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति करने में मदद मिलेगी।" उन्होंने बच्चों में कुपोषण, महिलाओं में एनीमिया या प्रोटीन की कमी को दूर करने के लिए संतुलित आहार लेने की आवश्यकता पर बल दिया है।
वहीं इफको के आर.एस. तिवारी ने कहाः “भूमि का स्वास्थ्य अच्छा रहे तो पोषण भी अच्छा होता है। राष्ट्रीय पोषण अभियान के दौरान लाभार्थियों को दिए जा रहे पोषण किट में रेडी टू इट फूड से बने व्यंजन, पोषण वाटिका में उत्पादित फल व सब्जियां तथा अन्य पौष्टिक खाद्य सामग्रियों को प्रमुखता से शामिल किया गया है। यह किट बच्चों, गर्भवती महिलाओं व शिशुवती माताओं में सुपोषण के लिए लाभकारी है।”
जागरुकता कार्यक्रम अवसर पर जिले की 105 आंगनबाड़ी कार्यकर्तां एवं कृषक महिलाओं को इफको के सहयोग से मौसमी सब्जियों के बीज पैकेट का वितरण किया गया।