NEET-UG री-एग्जाम तक टेलीग्राम बैन? दिल्ली हाईकोर्ट में पहुंचा मामला

त्वरित खबरें : अरुण रिपोर्टिंग

NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर संभावित प्रतिबंध का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। कंपनी ने अदालत में याचिका दायर कर कहा है कि री-एग्जाम तक प्लेटफॉर्म पर बैन लगाने की मांग न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि इससे करोड़ों वैध उपयोगकर्ता प्रभावित होंगे।

टेलीग्राम की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किए जाने के आधार पर पूरे नेटवर्क को बंद करना उचित नहीं है। कंपनी के CEO ने कहा कि पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन उनकी वजह से भारत के करीब 15 करोड़ उपयोगकर्ताओं को सजा देना न्यायसंगत नहीं है।

दरअसल, NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स की भूमिका पर सवाल उठे हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि टेलीग्राम के कुछ चैनलों और ग्रुप्स के जरिए परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री साझा की गई थी। इसी को लेकर याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि री-एग्जाम होने तक टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाई जाए।

टेलीग्राम ने अपने जवाब में कहा है कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और संदिग्ध चैनलों व अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। कंपनी का कहना है कि अवैध गतिविधियों में शामिल विशिष्ट समूहों और व्यक्तियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए, न कि पूरे प्लेटफॉर्म को बंद किया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, डिजिटल संचार और व्यवसायिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ सकता है। टेलीग्राम का उपयोग देश में छात्र, शिक्षक, कारोबारी और विभिन्न संगठन सूचना साझा करने तथा संवाद के लिए करते हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट अब इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला करेगा। अदालत का निर्णय न केवल NEET-UG पेपर लीक मामले की दिशा तय करेगा, बल्कि भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और नियमन को लेकर भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।