वाह: रे  दुर्ग बस स्टैंड,   अंधेर नगरी चौपट राजा !!
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दुर्ग जैसे औद्योगिक नगरी को स्मार्ट सिटी का सपना दिखाने वालों के मुंह पर दुर्ग बस स्टैंड की दुर्दशा एक तमाचे जैसा है अधिकारियों की बेशर्मी का बस स्टैंड दुर्ग एक उज्व्लंत उदाहरण है बस स्टैंड में बनी पानी की टंकी ना जाने कब से चुने एवं ब्लीचिंग पाउडर से सफाई हुई है गंदा बदबूदार पानी का लाखों लोगों द्वारा मजबूरन उपयोग किया जा रहा है ना जाने कितनी बीमारियां जन्म ले रही है और गंदगी में फल फूल रही है प्रतीक्षालय भी दुर्ग नगरी का ऐसा जहां सुविधा के लिए 14 पंखे लगे हैं किंतु वर्तमान में मात्र दो ही उपयोग हेतु उपलब्ध है बाकि बंद पड़े है शो-पिस की तरह,  प्रतीक्षालय की साफ सफाई नियमित एवं समय पर हो जाए तो बहुत बड़ी बात है जबकि हर दुकानदार से निगम मोटी टैक्स वसूल रही है निगम के महापौर एवं आयुक्त भी बैठकर अपना कामकाज वही करते हैं यहाँ "दिया तले अंधेरा" वाली कहावत चरितार्थ है, दुर्ग जबकि छत्तीसगढ़ शासन के गृह मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू का इलाका है बस स्टैंड की छवि सुधारने का एवं यात्रियों की सुविधा देने की पूरी उत्तरदायित्व एवं जिम्मेदारी नगर निगम की है | किन्तु निगम द्वारा उचित ढंग से कोई भी कार्य नही किया जा रहा है |

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