ट्रम्प मुस्लिम देशों से बोले- इजराइल से दोस्ती करें:पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ेंगी, वह इजराइल को देश भी नहीं मानता
त्वरित खबरे ;हर्ष कुमार गुप्ता

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर मुस्लिम देशों से इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने की अपील की है। ट्रम्प ने कहा कि मध्य पूर्व में स्थायी शांति और आर्थिक विकास के लिए जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा इस्लामिक देश इजराइल को मान्यता दें और उसके साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित करें। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है और कई मुस्लिम देशों में इजराइल को लेकर विरोध का माहौल है। ट्रम्प ने अपने कार्यकाल के दौरान ‘अब्राहम अकॉर्ड्स’ के जरिए संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मोरक्को और सूडान जैसे देशों के इजराइल से रिश्ते बहाल करवाए थे। अब उन्होंने कहा है कि आने वाले समय में और भी मुस्लिम देशों को इस दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए, क्योंकि इससे क्षेत्र में स्थिरता आएगी और व्यापार, निवेश तथा सुरक्षा सहयोग मजबूत होगा।

ट्रम्प के इस बयान के बाद पाकिस्तान की कूटनीतिक मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। पाकिस्तान आज भी इजराइल को आधिकारिक तौर पर एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता। पाकिस्तान का कहना है कि जब तक फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा नहीं मिलता, तब तक वह इजराइल के साथ संबंध स्थापित नहीं करेगा। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में कई बार ऐसी खबरें सामने आईं कि पाकिस्तान के कुछ नेता और कारोबारी गुप्त रूप से इजराइल के संपर्क में रहे हैं, लेकिन सरकार ने हमेशा इन खबरों से दूरी बनाई। ट्रम्प की अपील के बाद अब पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है, खासकर तब जब कई अरब देश पहले ही इजराइल से संबंध सामान्य कर चुके हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भविष्य में सऊदी अरब जैसे बड़े मुस्लिम देश भी इजराइल के साथ खुलकर रिश्ते मजबूत करते हैं तो पाकिस्तान की स्थिति और असहज हो सकती है। पाकिस्तान लंबे समय से खुद को मुस्लिम देशों की आवाज बताता रहा है, लेकिन बदलते वैश्विक समीकरणों में उसकी विदेश नीति पर सवाल उठ रहे हैं। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को खाड़ी देशों और पश्चिमी शक्तियों के साथ अच्छे संबंधों की जरूरत है। ऐसे में यदि वैश्विक मंच पर इजराइल को लेकर अलग-थलग पड़ने की स्थिति बनती है तो पाकिस्तान के लिए संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ट्रम्प ने यह भी कहा कि इजराइल और मुस्लिम देशों के बीच दोस्ती से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई मजबूत होगी और पूरे क्षेत्र में नई आर्थिक संभावनाएं पैदा होंगी। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक काम हुआ था। ट्रम्प का कहना है कि अगर भविष्य में उन्हें फिर मौका मिला तो वे और अधिक देशों को इस समझौते का हिस्सा बनाने की कोशिश करेंगे। हालांकि फिलिस्तीन समर्थक संगठनों और कई मुस्लिम देशों में ट्रम्प के बयान की आलोचना भी हो रही है। उनका कहना है कि फिलिस्तीन मुद्दे का स्थायी समाधान निकाले बिना इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करना न्यायसंगत नहीं होगा।

इधर पाकिस्तान के भीतर भी इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए पाकिस्तान को अपनी विदेश नीति में व्यावहारिक बदलाव करना पड़ सकता है, जबकि कट्टरपंथी संगठन और धार्मिक दल इसका विरोध कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी ट्रम्प के बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि मुस्लिम देशों और खासकर पाकिस्तान की सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या पश्चिम एशिया की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।

YOUR REACTION?

Facebook Conversations