शिक्षा व्यवस्था पर कांग्रेस का हमला: सरकार की नीतियों से बढ़ रही शाला-त्यागी बच्चों की संख्या
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रायपुर । छत्तीसगढ़ में स्कूली बच्चों के बढ़ते ड्रॉपआउट रेट के लिए सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार की दुर्भावना के चलते ही प्रदेश के साढ़े तीन लाख से अधिक बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ने मजबूर हुए हैं। भाजपा सरकार ने विगत शिक्षण सत्र के दौरान ही 10463 स्कूल बंद कियेए उन स्कूलों का डायस कोड़ मर्ज कर दियाए नए सेटअप के नाम पर सभी 56895 सरकारी स्कूलों में शिक्षक के न्यूनतम पदों की संख्या में कटौती करके नियमित शिक्षकों के 56,895 पदों को समाप्त कर दियाए छात्र शिक्षक अनुपात बढ़ाए, हर महीनें हजारों शिक्षक सेवानिवृत हो रहे हैं, लेकिन यह सरकार नई भर्ती नहीं कर रही है, उल्टे रिमोट एरिया में सीमित संसाधनों से वर्षों से सेवा दे रहे विद्या मितान, अतिथि शिक्षकए प्लेसमेंट और संविदा शिक्षकों को भाजपा सरकार आने के बाद नौकरी से निकाला गया है। यह सरकार नहीं चाहती कि गरीब बच्चों को निःशुल्क और उत्कृष्ट शिक्षा मिल सके।


प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा की सरकार में शिक्षा विभाग वसूली गिरोह की तर्ज पर चल रहा है। हाल ही में सरकारी स्कूल और बोर्ड परीक्षा फीस में बढ़ोत्तरी की गईए माध्यमिक शिक्षा मंडल ¼CGBSE½ 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा फीस में बड़ा इजाफा किया गयाए नियमित परीक्षा शुल्क 280 रुपये से बढ़ाकर 480 रु., मार्कशीट फीस 100 से 200 रुपए और प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) परीक्षा फीस 80 से बढ़ाकर 120 रूपय प्रति विषय कर दी गई। यही नहीं सरकारी स्कूलों में ट्यूशन और विकास शुल्क का अतिरिक्त बोझ भी छात्रों पर डाला गया है। विभिन्न गतिविधियों और निधियों (जैसे खेलए विज्ञानए निर्धन छात्र सहायता) के शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है, इस सरकार की दुर्भावना से छात्रों पर कुल वार्षिक बोझ कई गुना बढ़ गया है। निर्धन बच्चों के साथ अन्याय हैए अत्याचार है।


प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छात्रवृत्ति केवल एक योजना ही नहीं, अपितु गरीब परिवार के बच्चों के लिए पढ़ाई जारी रखने में बेहद मददगार होता है, इस सरकार ने ऑनलाइन पोर्टल की अनिवार्यता, आधार कार्ड और बैंक खाता के डिटेल्स, मिसमैच बताकर हजारों गरीब बच्चों को वंचित कर दिया है। पुस्तक, कापी, गणवेश, सायकल वितरण शिक्षण सत्र की समाप्ति तक व्यवस्थित नहीं हो सका उसी का परिणाम है कि प्रदेश के लाखों गरीब बच्चों को शिक्षा बीच में ही छोड़ने मजबूर होना पड़ा।


प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि इस सरकार की अकर्मण्यता से ही छत्तीसगढ़ में शिक्षा की गुणवत्ता में लगातार गिरावट आ रही है। विगत विधानसभा चुनाव के दौरान मोदी की गारंटी के नाम पर युवाओं से 57 हजार शिक्षकों की भर्ती का वादा किया थाए ढाई साल की सरकार में प्रदेश के डीएड, बीएड प्रशिक्षित युवा, शिक्षक भर्ती का इंतज़ार कर रहे हैए सरकार सिर्फ घोषणा कर रही है। पूर्व शिक्षा मंत्री ने पहले ही सत्र में विधानसभा में 33 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की, फिर सदन में वित्त मंत्री ने 20 हजार पदों में भर्ती की घोषणा, उसके बाद मुख्यमंत्री ने 5 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की जो सिर्फ घोषणा है, सरकार अपने स्टैंड में खुद कायम नहीं है, इसका नुकसान यहां के गरीब बच्चों को उठाना पड़ रहा है, यह सरकार शिक्षा विभाग की दुर्दशा करके छात्रों और उनके अभिभावकों का भरोसा खो चुकी है।

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