19/अगस्त /2022राजनांदगांव। आजादी के अमृत महोत्सव पर दिग्विजय नगर समिति के अध्यक्ष दुष्यंत दास एवं अन्य पदाधिकारियों ने राजनांदगांव रियासत के राजा स्व दिग्विजय दास और उनके देश प्रेम का पुण्य स्मरण किया । दास ने कहा कि राजा साहब ने एक समृद्व राष्ट्र की कल्पना की थी जिसमें राजनांदगांव और उनके निवासी भी सुखी और विकासशील हो। इस दिशा में उन्होंने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उनका सपना था कि शहर को पूरे देश विदेश में अलग पहचान मिले। उसकी बसाहट और आधारभूत सुविधाओं का अन्य शहर अनुकरण करे। शहरवासी खेल, साहित्य, शिक्षा और प्रशासन के क्षेत्र में मुकाम हासिल करें। दास ने कहा कि राजा साहब के इन सपनों को साकार की जिम्मेदारी यहां के निवासियों की है जिसकी शुरूआत दिग्विजय नगर समिति ने कर दी है।
इस अवसर पर दास ने कहा कि महंत राजाओं ने शहर को रियासतकाल से ही आगे रखा था। तब दूर-दूर तक उसके बसाहट के साथ बिजली, पानी, मील और ट्रेन जैसी आधुनिक सुविधाएं की चर्चा होती थी। रायपुर, दुर्ग जैसे प्रमुख शहरों में इस तरह की सुविधाओं का नामोनिशान तक नहीं था। पहले महंत बलराम दास ने फिर उनके पुत्र सर्वेश्वरदास ने रियासत को सुंदर और व्यवस्थित रूप दिया। यहां के महल, भवन, पावर हाउस, बी एन सी मिल, जल संयंत्र सभी दर्शनीय के साथ तकनीकी की मिसाल थे। उनके कार्यों को सर्वेश्वरदास के पुत्र दिग्विजय दास ने आगे बढ़ाया। उन्होंने सत्तारूढ़ होते ही हर क्षेत्र में शहर को नई उंचाईयां दी। खासतौर पर हॉकी, शिक्षा, राजनीति, कला साहित्य का केंद्र बनाया।
राजाजी राजनीतिक और प्रशासनिक विकास को भलीभाति समझते थे जिसके कारण उस जमाने में प्रदेश कांग्रेस कमेटी(तत्कालिन मध्यप्रदेश) को एक लाख रूपये का दान किया। उनकी दानशीलता की कोई सीमा नहीं थी
दिग्विजय दास ने अपने महल को महाविद्यालय के स्थापना के लिए दान कर दी जो आज प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेजों में से एक है। राजा में हॉकी के प्रति जुनून था जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने मुक्त हस्त से दान किया। उनके प्रयासों से 1941 में सर्वेश्वरदास के पुण्य स्मरण में आल इंडिया हॉकी टूर्नामेंट का आयोजन शुरू हुआ जिसके वे संस्थापक बने। उनका सपना था कि राजनांदगांव से राष्ट्रीय स्तर के हॉकी खिलाड़ी निकले और शहर का नाम खेल मानचित्र में स्थापित करे। उनकी यही सोच की परिणति के रूप में यह टूर्नामेंट पूरे देश के प्रमुख हॉकी प्रतियोगिता बन चुका है। राजा दिग्विजय दास चाहते थे कि हॉकी के जादूगर उनके शहर में अपना खेल दिखाए जो बाद में उनके नाम से बनी दिग्विजय स्टेडियम से ध्यानचंद के खेलने से साकार हुआ। राजाजी स्वयं एक शिक्षा विद थे जिसके कारण वे शिक्षा के क्षेत्र में दिग्विजय कॉलेज की स्थापना करवाई। उसके लिए अपना महल दान और पुस्तकालय दान में दिया। लोगों को रोजगार दिलाकर उनका जीवन स्तर बेहतर करने के लिए प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर करीब 18 हजार एकड़ कृषि भूमि भी दान में दी। उन्होंने यूुरोप का दौरा कर वहां के सामाजिक और आर्थिक संरचना का अध्ययन किया। भारत आकर ऐसा ही ढांचा राजनांदगांव में स्थापित करना चाहते थे। यह उनका सबसे बड़ा सपना था। इस सपने के कई अंशों को उन्होंने अपने अल्प जीवनकाल में ही मूर्तरूप दे दिया था। उन्होंने एक ऐसे राजनांदगांव की स्थापना की थी जो शिक्षा, उद्योग, रोजगार, खेल, स्थापत्य कला के क्षेत्र में अपने समकालीन शहरों से काफी आगे था। उन्होंने एक ऐसा शहर बनाने का सपना संजोये था जो उस समय ही नहीं बल्कि भविष्य में भी बेजोड़ हो। लेकिन विधि को यह मंजूर नहीं था जिसके कारण राजाजी मात्र 25 वर्ष की अल्पायु में दुनिया छोड़ दिए। उनके निधन के बाद शहर राजनीति और प्रशासनिक रूप से भेदभाव का शिकार होकर विकास की रफ्तार में रायपुर, दुर्ग जैसे शहरों से पिछड़ गया। लेकिन उनके सपने को पूरा करने का बीड़ा दिग्विजय नगर समिति ने शहरवासियों के साथ मिलकर उठाने का निर्णय ले लिया है। उनके सपने को दिग्विजय नगर की संकल्पना बनाकर समिति ने जनसमर्थन अभियान शुरू किया है। इस अभियान को मिल रहे व्यापक समर्थन से दिग्विजय नगर की संकल्पना हकीकत का आकार लेगी साथ ही राजाजी के अधूरे सपने पूरे होंगे। स्वतंत्रता दिवस के पावन मौके पर शहर की हर पीढ़ी को राजा दिग्विजय दास को नमन कर उनके कार्यो को आगे बढ़ाने का प्रण करना चाहिए ताकि अपना शहर दिग्विजय नगर के रूप में विकास की नई इबारत लिखे।

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