पेड़ों की परवाह नहीं : सीसी रोड तने से सटाकर बना रहे, पानी जाने का रास्ता बंद...सूख कर गिर रहे....
त्वरित ख़बरें - निशा बिस्वास छत्तीसगढ़ ब्यूरों


मानूसन की एंट्री के साथ ही शहर में सरकारी और प्राइवेट तौर पर पौधरोपण शुरू हो गया है। वन विभाग के साथ प्रशासनिक अमला फ्री में पौधे बांट रहा है। सड़कों के किनारे और बीचोबीच डिवाइडर पर पौधे लगाए जा रहे हैं, लेकिन पांच-दस साल पहले लगाए गए पौधों की देखभाल तो दूर अब उनके लिए ऐसे हालात पैदा किए जा रहे हैं कि वे सूखकर गिर रहे हैं।

दरअसल शहर में जहां भी कोई प्रोजेक्ट लाया या डामरीकरण किया जा रहा है, वहां पौधों के चारों ओर आधा मीटर गोलाई वाले हिस्से को खुला नहीं छोड़ा जा रहा है। पेड़ की गोलाई से चिपकाकर डामरीकरण और सीमेंटकरण किया जा रहा है, जबकि ये पूरी तरह से गलत है। पेड़ों के लिए इतनी भी जगह नहीं छोड़ा जा रहा कि उसे पानी मिल सके। यानी एक तरह से उसके खाद व पानी मिलने का रास्ता ही बंद कर दिया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है पानी नहीं मिलने से ये पेड़ सूखकर गिर जाएंगे। इस संबंध में महापौर एजाज ढेबर का कहना है कि जो मापदंड है उसका पालन करवाया जाएगा।

नई चौपाटी ही नहीं शंकरनगर, तेलीबांधा में भी तने तक डामरीकरण
दैनिक भास्कर ने सर्वे के दौरान देखा रविवि के सामने बन रही नई चौपाटी के पास सड़क किनारे के दर्जनों पेड़ के चारों ओर सीमेंटकरण कर दिया गया है। शंकरनगर भगत सिंह चौक के चारों ओर लगे पेड़ों को डामरीकरण से पैक किया गया है। शांतिनगर और शंकरनगर चौक की ओर से जाने वाले रास्ते के पेड़ भी डामरीकरण में पैक हो चुके हैं। महादेव घाट जाने वाले रास्ते में भी दर्जनों पेड़ों का तना डामरीकरण से पैक हो चुका है।

एक पेड़ का सूखना जीव हत्या जैसा है, पेड़ कम लगाएं पर बचाएं
हमारी तरह पेड़ों में भी जीवन हैं। बस फर्क इतना है कि हम चल-फिर सकते हैं और पेड़ स्थिर हैं। पेड़ हमारे निस्वार्थ सेवक हैं। अगर पेड़ों के चारों तरफ तने से सटाकर सीमेंटीकरण हो रहा है तो ये उनके लिए भोजन-पानी के बिना तड़प-तड़पकर मरने के लिए छोड़ने जैसी क्रूरता है। पेड़ के इर्दगिर्द कम से कम एक फुट या एक-डेढ़ गोलाकार जमीन हर हाल खाली छोड़नी चाहिए।

ऐसा नहीं हो रहा है तो पेड़ों की हालत कुपोषित बच्चे की तरह हो जाएगी। तन पतला रह जाएगा। उसको फैलने का जगह नहीं मिल पाएगा। ऐसे में तना उस बोझ को सहन नहीं कर पाएगा और एक दिन समय से पहले गिर जाएगा। यह एक पेड़ गिरने की घटना नहीं होगी, बल्कि एक जीवन की हत्या होगी। यह जीव हत्या है और हम सब उस पाप में भागीदार होंगे। इसलिए ज्यादा पौधे लगाने के बजाए कम ही लगाएं लेकिन उनको जिंदा बचाएं। कोशिश करनी चाहिए कि एक भी पौधा न मरे। 

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