नकाबपोश दंगाई मंदिर और घरों पर टूट पड़े, रोकने तैनात था एक सिपाही; चंद मिनटों में जल उठा शहर
त्वरित खबरे - खरगोन दंगे का दंग

इंदौर १५ अप्रैल  

मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी को भड़के दंगे के चार दिन बाद इसके दो CCTV फुटेज सामने आए हैं। इनमें साफ नजर आ रहा है कि नकाबपोश दंगाइयों ने शहर में किस तरह उत्पात मचाया। वहीं, यह भी दिखाई दिया कि हालात बिगड़ने के हिसाब से पुलिस-प्रशासन की कोई तैयारी नहीं थी।

वीडियो में दिख रहा है कि शीतला माता मंदिर गोशाला मार्ग पर जब दंगाइयों की भीड़ मंदिर से लेकर घरों को निशाना बना रही थी, तब उनके बीच केवल एक पुलिसकर्मी तैनात था। वह अकेला ही लाठी के सहारे नकाबपोश दंगाइयों को रोकने की कोशिश में जुटा रहा, लेकिन बड़ी भीड़ के आगे उसकी कवायद नाकाम साबित हुई।

एक पुलिसकर्मी दंगाइयों की भीड़ को रोकने की कोशिश करता दिखाई देता है। उसकी कोशिश नाकाम रही। बताया गया है कि हालात बिगड़ने के बावजूद पुलिसकर्मी ने अफसरों और कंट्रोल रूम को इसकी सूचना नहीं दी। नतीजतन नकाबपोश दंगाइयों की भीड़ शीतला माता मंदिर और उसकी नजदीक के घरों पर हमला करती रही। इन लोगों ने ताबड़तोड़ पत्थर भी बरसाए।

एक पुलिसकर्मी डंडे और सीटी की मदद से दंगाइयों को रोकने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच कुछ उपद्रवी पत्थर लेकर घरों पर टूट पड़े। खिड़कियों और दरवाजों को लातें मारीं। इस वीडियो में पुलिसकर्मी की लापरवाही भी दिख रही है। वह सड़क पर दंगाइयों को देखता रहा। नतीजा, चंद मिनटों में पूरा शहर दंगे से जल उठा।

चेहरों पर नकाब बांधकर टूट पड़ी भीड़

रामनवमी पर शाम 5:46 पर दंगाई चेहरे पर नकाब बांधकर आए। इलाके में मंदिर समेत घरों पर पथराव करने लगे। वीडियो में एक पुलिसकर्मी हाथ में डंडा लिए मंदिर के पास खड़ा दिख रहा है। बचाव करते-करते पुलिसकर्मी की टोपी भी गिर जाती है। उपद्रवियों ने उसकी एक नहीं सुनी। इसके बावजूद उसने वायरलेस सेट या मोबाइल से अफसरों और कंट्रोल रूम को सूचना नहीं दी।

पुलिस-प्रशासन की लापरवाही उजागर

घटना में पुलिस प्रशासन की चूक सामने आई थी, लेकिन CCTV फुटेज से अब ये बात साफ हो गई है। यदि पुलिसकर्मी समय पर पहुंच जाते, तो दंगाइयों को कंट्रोल किया जा सकता था।

दो परिवारों को बनाया निशाना

शीतला माता मंदिर के पास रहने वाले त्रिलोक जाधव और धन्नालाल के घरों को दंगाइयों ने निशाना बनाया था। इलाके के पास दूसरे पक्ष के लोग अधिक रहते हैं। इस कारण सूचना के बाद वह घरों से निकलकर आए। मंदिर पर पत्थर फेंकने लगे।

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