साथ ही इसमें बौनापन समेत 14 और शामिल
छत्तीसगढ़ देश में पहला ऐसा राज्य है जहां पार्किन्सन-बौनापन जैसी 21 प्रकार की दिव्यांगता पर दिव्यांगों की गणना की गई है। इसके पहले 2011 में हुई जनगणना में सिर्फ 7 प्रकार की दिव्यांगता ही शामिल की गई थी। इसका असर यह हुआ कि प्रदेश में दिव्यांगों की संख्या 1.46 लाख बढ़कर अब 7.70 लाख हो गई है।
समाज कल्याण विभाग का कहना है कि इन सभी दिव्यांगों को सरकारी लाभ मिलेगा। बता दें कि छत्तीसगढ़ बनने के बाद पहली बार राज्य सरकार ने दिव्यांगों की गणना की है। इसके पहले कई बार प्रयास किये गए, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए। 2011 में हुई जनगणना के अनुसार प्रदेश में 6.24 लाख दिव्यांग थे।
समाज कल्याण विभाग पिछले 6 महीने से एक-एक घर में जाकर दिव्यांगों की गणना कर रहा था। विभाग का दावा है धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्राें में भी यह गणना हुई है। निर्वाचन आयोग ने भी विभाग से दिव्यांगों के आंकड़ें मांगे हैं, जिससे सभी के वोटर आईडी कार्ड बनाए जा सके। चुनाव के पहले हुई यह गणना के कई मायने हैं।
जांजगीर-चांपा में सर्वाधिक 56 हजार नारायणपुर में सिर्फ 3 हजार दिव्यांग
छत्तीसगढ़ में दिव्यांगों की संख्या 7.70 लाख निकली है। जहां तक जिलों की बात की जाए तो सबसे अधिक 56 हजार दिव्यांग जांजगीर-चांपा में तो सबसे कम 3 हजार नारायणपुर में हैं। शहरों की अपेक्षा ग्रामीण इलाकों में दिव्यांग अधिक हैं। शहरी इलाके में 16.2 प्रतिशत तो ग्रामीण क्षेत्रों में 83.8 प्रतिशत दिव्यांग रहते हैं।
आगे क्या - इस आधार पर बनाए जाएंगे सर्टिफिकेट
समाज कल्याण विभाग सभी जिलों में कैंप आयोजित कर इनका मेडिकल सर्टिफिकेट बनायेगा। इसके बाद दिव्यांगता के आधार पर उन्हें शासकीय योजनाओं से लाभान्वित किया जाएगा। सभी का आॅनलाइन डाटा अपडेट किया जाएगा। दिव्यांग अभी तक किस योजना का लाभ ले रहे थे इसका डाटा भी तैयार किया जाएगा।
तेजाब पीड़ितों को भी दिव्यांग माना
दिव्यांगों की हुई इस जनगणना में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के अनुसार 21 प्रकार की दिव्यांगता को शामिल किया गया। इसके पहले 2011 की जनगणना दृष्टिहीनता, अल्पदृष्टिबाधित, कुष्ठ रोग, बधिर, लोकोमोटर, मानसिक रुग्णता और बौद्धिक दिव्यांगता के आधार पर ही हुई थी। छत्तीसगढ़ सरकार की गणना में इन सात के अलावा इन दिव्यांगता को भी जाेड़ा गया है। प्रदेश में सबसे अधिक लोकोमोटर दिव्यांगता के मामले मिले हैं, जबकि सबसे कम चिरकारी तंत्रिका दशाएं के दिव्यांग मिले हैं।
ये दिव्यांगता की श्रेणी में
ऑटिज्म, तेजाब पीड़ित, सेरेब्रल पाल्सी, क्रॉनिक न्यूरोलॉजिकल कंडीशंस, बौनापन, हीमोफीलिया, मल्टीपल स्कलेरोसिस, मांसपेशी दुर्विकास, पार्किन्सन, सिकल कोशिका रोग, वाक एवं भाषा, थैलीसिमिया, लर्निंग डिसेबिलिटी और मल्टीपल डिसेबिलिटी। इसी तरह दिव्यांगों की उम्र के आधार पर भी जनगणना की गई। इसमें 67 प्रतिशत दिव्यांग 15 से 59 साल के मिले। 4 साल तक 1.1 प्रतिशत, 5 से 14 साल के 6.4 प्रतिशत, 60 वर्ष से अधिक 25.5 प्रतिशत दिव्यांग मिले।

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