डोंगरगढ़ जनपद पंचायत में घमासान, CEO भगवती साहू के खिलाफ जनप्रतिनिधियों ने खोला मोर्चा
15 लाख रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति पर उठे सवाल, दो दिन का अल्टीमेटम; तीसरे दिन तालाबंदी की चेतावनी
डोंगरगढ़। जनपद पंचायत डोंगरगढ़ में विकास कार्यों की स्वीकृति को लेकर विवाद गहरा गया है। जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) भगवती साहू की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जनपद पंचायत अध्यक्ष लता अजय सिन्हा, उपाध्यक्ष हीराराम वर्मा सहित जनपद सदस्यों ने मोर्चा खोल दिया है। जनप्रतिनिधियों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), डोंगरगढ़ को सूचना पत्र सौंपकर CEO के स्थानांतरण की मांग की है। साथ ही दो दिनों के भीतर मांग पूरी नहीं होने पर तीसरे दिन जनपद पंचायत कार्यालय में तालाबंदी करने की चेतावनी दी है।
तीन ग्राम पंचायतों में 15 लाख के कार्यों की स्वीकृति पर विवाद
जनपद सदस्यों द्वारा सौंपे गए सूचना पत्र के अनुसार, CEO भगवती साहू पर आरोप है कि अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और जनपद सदस्यों की सहमति के बिना विकास कार्यों को स्वीकृति दी जा रही है। सदस्यों का दावा है कि तीन ग्राम पंचायतों में सामान्य सभा का प्रस्ताव पारित किए बिना लगभग 15 लाख रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई।
इस मामले को लेकर जनप्रतिनिधियों ने निर्धारित प्रक्रिया के पालन और विकास कार्यों की स्वीकृति में पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस संबंध में पहले भी आपत्ति दर्ज कराई गई थी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन की चेतावनी देनी पड़ रही है।
दो दिन का अल्टीमेटम, तीसरे दिन तालाबंदी की चेतावनी
जनपद पंचायत अध्यक्ष लता अजय सिन्हा, उपाध्यक्ष हीराराम वर्मा सहित अन्य सदस्यों ने CEO के स्थानांतरण की मांग करते हुए प्रशासन को दो दिनों का समय दिया है। जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई नहीं होने पर तीसरे दिन जनपद पंचायत कार्यालय में तालाबंदी की जाएगी।
सूचना पत्र में तालाबंदी की स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन पर होने की बात भी कही गई है। इस चेतावनी के बाद जनपद पंचायत में प्रशासनिक हलचल बढ़ने की संभावना है।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
इस पूरे मामले में अब प्रशासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विकास कार्यों की स्वीकृति से संबंधित दस्तावेजों की जांच, सामान्य सभा के प्रस्तावों की स्थिति और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने के बाद ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल, जनप्रतिनिधियों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और CEO भगवती साहू का पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि प्रशासन जनप्रतिनिधियों की मांग पर क्या कदम उठाता है और क्या दो दिन के भीतर विवाद का समाधान निकलता है या मामला तालाबंदी तक पहुंचता है।

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