डीपीआर हैदराबाद से मान्यता : कामधेनु विवि ने मुर्गी की नई ब्रीड सोनकुकरी तैयार की देशी से तीन गुना... अधिक देगी अंडे, पौष्टिकता भी उतनी ही
त्वरित ख़बरें - निशा छत्तीसगढ़ ब्यूरो

कामधेनु विश्वविद्यालय ने मुर्गी की नई ब्रीड तैयार की है। जिसे सोनकुकरी नाम दिया गया है। अंडे के उत्पादन और वजन में वृद्धि दोनों ही मामलों में नई ब्रीड की मुर्गी देशी मुर्गी से बेहतर प्रदर्शन कर रही है।पहले जेनरेशन की सोनकुकरी मुर्गी तैयार करने के बाद विश्वविद्यालय की टीम उनकी मानीटरिंग कर रही है। विवि के एनीमल जेनेटिक एंड ब्रीडिंग विभाग द्वारा तैयार की गई मुर्गी की नई नस्ल सोनकुकरी को केंद्र की डायरेक्टोरेट आफ पोल्ट्री रिसर्च (डीपीआर) हैदराबाद ने मान्यता दे दी है। पहले जेनरेशन की नई ब्रीड सोनकुकरी मुर्गी देशी मुर्गी के मुकाबले एक वर्ष में 120 तक अंडे देगी जबकि देशी मुर्गी साल में 35 से 40 अंडे ही देती है।

देसी गायों के लिए खुलेगा प्रदेश का पहला न्यूक्लियस हर्ड

कामधेनु विवि को एक और सफलता हासिल हुई है। प्रदेश के देशी गाय की कोसली ब्रीड को नेशनल ब्यूरो आफ एनिमल जेनेटिक रिसर्च (एनबी जीआर) करनाल में मान्यता मिलने के बाद केंद्र और राज्य सरकार ने न्यूक्लियस हर्ड को भी मंजूरी दे दी है। इस सेंटर को खोलने में 10 करोड़ खर्च होंगे। इनमें से 7 करोड़ केंद्र और 3 करोड़ राज्य सरकार देगा। अंजोरा स्थित विवि परिसर में खुलने जा रहे न्यूक्लियस हर्ड में कोसली ब्रीड की देसी गायों के संरक्षण और संवर्धन का काम होगा। बताया गया कि देश में गायों की 50 प्रजाति एनबीएजीआर में पंजीकृत है। इनमें छत्तीसगढ़ से किसी भी गाय की पंजीयन नहीं था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने काफी अध्ययन और शोध के बाद पहली बार देसी गाय का पंजीयन कराने में सफलता प्राप्त की। जिसे कौशल क्षेत्र के नाम से कोसली ब्रीड नाम दिया गया। इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भी ज्यादा है।

इसलिए खोलना पड़ रहा न्यूक्लियस हर्ड

शोधार्थियों का कहना है कि कोसली नस्ल की गायों को अन्य प्रजातियों की गायों के साथ रहने से उनकी प्रजाति खतरे में है। लिहाजा इसे संरक्षित और संवर्धन की जरूरत है। इसे ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय की ओर से न्यूक्लियस हर्ड खोलने का प्रस्ताव केंद्र और राज्य को भेजा गया था। केंद्र ने पहले ही इसे मंजूरी दे दी थी। अब राज्य ने भी सैद्धांति

देसी मुर्गियों के साथ कर रहे हैं परीक्षण

डीपीआर से मंजूरी मिलने के बाद विभाग ने 500 सोनकुकरी मुर्गी तैयार कर अगले डेढ़ वर्ष तक उन्हें परीक्षण में रखा गया है। इस दौरान यह देखा जा रहा है कि इस मुर्गी को सामान्य वातावरण में रहने में किसी तरह की परेशानी तो नहीं हो रही। इसके लिए उनके साथ देसी मुर्गियों को भी रखा गया है। साथ ही उनके अंडे से तैयार होने वाली नई ब्रीड का भी परीक्षण किया जा रहा।

YOUR REACTION?

Facebook Conversations