दुर्ग जिला पुलिस में पदस्थ यातायात निरीक्षक ने थाईलैंड में आयोजित इंटरनेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ और भारत देश का नाम रोशन किया है, पुलिस निरीक्षक का नाम संग्राम सिंह धुर्वे है| उन्होंने इस प्रतियोगिता में दौड़ के इस खेल में हिस्सा लेकर दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत देश का झंडा विदेश कि धरती पर लहराया और देश व छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है | बचपन से ही दौड़ने का शौक रखने वाले पुलिस निरीक्षक संग्राम सिंह धुर्वे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हासिल किया | संग्राम सिंह धुर्वे ने 6 से 8 फरवरी तक थाईलैंड में आयोजित इंटरनेशनल गेम में हिस्सा लिया इस दौरान उन्हें 200 मीटर दौड़ में 6 फरवरी को प्रथम स्थान अर्जित करते हुए स्वर्ण पदक जीतने की सफलता मिली 4 गुना 100 मीटर की रिले टीम के माध्यम से भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीता वहीं 400 मीटर दौड़ में उन्हें कांस्य पदक प्राप्त हुआ | इंटरनेशनल गेम्स में 3 पदक जीतकर निरीक्षक संग्राम सिंह धुर्वे ने छत्तीसगढ़ और भारत देश को गौरान्वित किया उनकी इस उपलब्धि से छत्तीसगढ़ पुलिस को प्राउड फील कराया है |
संग्राम सिंह धुर्वे की जीवन संघर्ष की कहानी
अनूपपुर के पुष्पराजगढ़ तहसील के ग्राम खेतगांव में जन्मे संग्रामसिंह पिता कुंवरसिंह धुर्वे 20 अगस्त 1997 में आरक्षक के पद पर पदस्थ हुआ, जिसकी पहली पोस्टिंग मप्र.सीधी में हुई थी। पहली पोस्टिंग में संग्रामसिह ने कुख्यात डकैत देवीसिंह यादव को दो नग पिष्टल के साथ अपनी जान का परवाह किये बिना जिंदा पकडने में सफलता हासिल की। इसके बाद वर्ष 2003 में मध्यप्रदेश से राज्य स्थानान्तरण के दौरान छत्तीसगढ़ प्रदेश हो गया और पुलिस मुख्यालय में आमद देने के तुरन्त बाद जिला दन्तेवाड़ा स्थानांतरण कर दिया गया। जिला दन्तेवाड़ा में आमद के बाद जिले के सबसे खतरनाक थाना भेजी में पोष्टिंग की गई, जहां पर नागा बटालियन के 5 जवानों को नक्सली मुड़भेड़ में शहीद होते देखकर यह ठान लिया की अब नक्सलियों से लड़ाई लडऩा जरूरी है। भेजी थाना जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा से दूर होने के कारण मेन रोड इंजरम से लगभग 15/20 किलो मीटर पैदल चलना पड़ता था और आने जाने के दौरान हमेशा नक्सलियों से एन्काउन्टर होता रहता था जो आदत में सुमार हो गया। नक्सलियों के हर गतिविधियों को ध्यान देना शुरु कर दिया ।
इतना ही नही इसके अलावा 16 वर्ष 315 एनकाउंटर मे शामिल
बताया जाता है कि 2008 से 2018 तक आरक्षक होने के बाद भी वरिष्ट अधिकारियों के निर्देशन में नक्सलियों के साथ लड़ाई का कमान खुद संभालकर और नक्सलियों के साथ लोहा लेने लगा बस्तर जिला दन्तेवाड़ा में 16 साल के तैनाती में कुल 315 एन्काउन्टर हुऐ जिससे अलग-अलग पुलिस नक्सली मुड़भेड़ में 71 नक्सली बरामद करने में सफलता हासिल किया।

नक्सलियों ने गोली मारी फिर भी लड़ते रहे
उक्त समय में अभी वर्तमान पुलिस अधीक्षक दुर्ग डॉ अभिषेक पल्लव के नेतृत्व मे चलाये जा रहे नक्सली विरोधी अभियान में जिला दंतेवाड़ा और जिला सुकमा ग्राम बुरबूम के बोद्देपारा मे पुलिस नक्सली मुठभेड़ के दौरान दाहिने हाथ में गोली लगने से घायल होने के बाद घटना स्थल मे ही डॉ अभिषेक पल्लव के द्वारा प्रारम्भिक उपचार कर जिला अस्पताल दंतेवाड़ा के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच रवाना किया गया l संग्राम सिंह ने छग के बस्तरसंभाग के सभीजिलों दन्तेवाड़ा, सुकमा,बीजापुर,नारायणपुर,कांकेर,कोण्डागांव और जगदलपुर में एनकाउंटर किए है, इस दौरान नक्सली बटालियन, नक्सली कम्पनी,नक्सली प्लाटून,नक्सली एलओएस,नक्सली एलजीएस और नक्सलियों के छोटे बड़े सभी संगठनों के साथ मुड़भेड़ हुई। नक्सलियों ने अपना निशाना भी बनाया, जिसमें संग्रामसिंह घायल हुआ, इसके बाद भी लड़ता रहा,यहां तक कि नक्सलियों के पीछा करने के दौरान नक्सलियों दवारा लगाऐ गऐ मूवीटेरेप में फंसने से लोहे के सरिया पैर से पार हो गया। 2 बार घायल होने के बाद जब 15 दिन रायपुर में ईलाज के भर्ती कराया गया।
नक्सली कैम्प ध्वस्त किया गया
संग्राम सिंह की दन्तेवाड़ा से जिला राजनांदगांव स्थानांतरण के बाद बुकमरका पहाड़ में 4 नम्बर नक्सली कम्पनी के साथ मुड़भेड़ हुई,जहां पर नक्सलियों के कैम्प ध्वस्त करने में सफलता हासिल की। संग्रामसिंह की बहादुरी को देखते हुए छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग ने 4 प्रमोशन किए, जिसके चलते संग्रामसिंह आरक्षक से पुलिस इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ हो गया।
उफनाती नदी में कूद गया था
छग के जिला दन्तेवाड़ा तैनाती के दौरान एक गोताखोर की अहम भूमिका भी निभाई है, जहां बाढ़ के दौरान उफनाती नदी में कूदकर चार लोगों के निकालकर लाया, इस दौरान चारों की मौत हो चुकी थी। इस बहादुरी के लिए एसपी दंतेवाड़ा ने संग्रामसिंह को सम्मानित किया।
किसान के बेटे की ऐसी हुई शिक्षा
अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ तहसील ग्राम खेतगांव के निवासी निरीक्षक संग्राम सिंह धुर्वे पिता कुंवर सिंह धुर्वे जो बचपन से ही काफी संघर्षशील रहा, एक गरीब परिवार में जन्म होने के कारण 8 वी तक की पढ़ाई गांव के स्कूल में की, इसके बाद क्रीड़ा परिसर अमरकंटक में 10 वी तक पढ़ाई फिर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लखौरा में 12 वी पास कर पुष्पराजगढ़ कालेज में पढाई पूरी की। एक गरीब परिवार के होने के कारण होस्टल में रहता और किराये के लिए पैसा की व्यवस्था नही होने के कारण घर से ही 22 किलोमीटर दौड़ते हुऐ जंगल पहाडियों के रास्ते से स्कूल जाते थे।
मजदूरी कर काफी, किताब खरीदता रहा
गर्मियों के छुट्टियों में मजदूरी कर अपने लिए कापी किताब खरीदता रहा, जिससे पढ़ाई में किसी प्रकार की रुकावट न आ सके। इस तरह से संग्रामसिंह ने अपनी शिक्षा पूरी की और पुलिस आरक्षक के लिए प्रयास किए और सफलता प्राप्त की।
खिलाड़ी के रुप में कई गोल्ड मैडल प्राप्त किए
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जवान संग्रामसिंह ने एक खिलाड़ी के रुप में जब मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ एक हुआ करता था उस समय 400 मीटर,800 मीटर,1500 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीतकर और मध्यप्रदेश चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम किया। छत्तीसगढ़ स्थानांतरण के बाद पुलिस मीट में कई बार 200मीटर,400 मीटर,800मीटर,1500 मीटर,3000 मीटर, 5000 मीटर, 10000 मीटर दौड रिले रेस एवं 42 किलोमीटर मैराथन दौड़ में भी मेडल जीता. एक खिलाड़ी के साथ, स्वयं गीत, लिखना गीत, गाना और स्वयं संगीत बनाने का कला भी है।
यूट्यूब चैनल JNM CG MUSIC में संग्राम सिंह धुर्वे के द्वारा लिखे और गाए हुए गाना हिन्दी छत्तीसगढ़ी भजन लोक गीत सुन सकते हैं।

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