90 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाला एनिमेटेड शो ‘जंगल बुक’ बच्चों का सबसे पसंदीदा कार्यक्रम हुआ करता था। रविवार की सुबह जैसे ही टीवी पर इसका मशहूर टाइटल ट्रैक ‘जंगल-जंगल बात चली है, पता चला है... चड्डी पहन के फूल खिला है’ सुनाई देता था, बच्चे उत्साह से टीवी स्क्रीन के सामने बैठ जाते थे। उस दौर में मनोरंजन के सीमित साधनों के बीच यह शो बच्चों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं था।
‘जंगल बुक’ की कहानी मोगली नाम के एक ऐसे बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे जंगल में भेड़ियों का झुंड पालता है। मोगली के साथ उसके दोस्त बालू और बघीरा हमेशा खड़े रहते हैं, जबकि शेर खान उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। रोमांच, दोस्ती, साहस और जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों से भरपूर इस शो ने बच्चों के साथ-साथ बड़ों का भी दिल जीत लिया था।
बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘जंगल बुक’ के हिंदी टाइटल सॉन्ग के बोल मशहूर गीतकार गुलजार ने लिखे थे, जबकि इसका संगीत प्रसिद्ध संगीतकार विशाल भारद्वाज ने तैयार किया था। यही वजह है कि यह गीत आज भी लोगों की जुबान पर बना हुआ है और सुनते ही बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं।
यह सीरीज अंग्रेजी लेखक रुडयार्ड किपलिंग की प्रसिद्ध पुस्तक ‘द जंगल बुक’ पर आधारित थी। मूल रूप से इसका निर्माण जापान में किया गया था और भारत में इसे वर्ष 1993 में दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया। देखते ही देखते यह शो देशभर के बच्चों का पसंदीदा बन गया।
कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 में जब ‘जंगल बुक’ को दोबारा प्रसारित किया गया, तब नई पीढ़ी ने भी इसे खूब पसंद किया। इससे साबित होता है कि मोगली और उसके दोस्तों का जादू समय के साथ कम नहीं हुआ है।
आज भले ही मनोरंजन के अनगिनत विकल्प मौजूद हों, लेकिन ‘जंगल बुक’ और उसका यादगार गीत ‘चड्डी पहन के फूल खिला है’ 90 के दशक के बच्चों के दिलों में हमेशा खास जगह बनाए रखेगा। यह सिर्फ एक टीवी शो नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी की खूबसूरत याद है।

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