सेक्टर- 2 स्थित श्री अय्यप्पा मंदिर में उत्साह के अंतिम दिन...का कार्यक्रम हुआ संपन्न

त्वरित ख़बरें - निशा बिस्वास छ.ग.ब्यूरो प्रमुख

भिलाई  / त्वरित ख़बरें /

भगवान अय्यप्पा के पिता शिव और माता मोहिनी हैं

 पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान अय्यप्पा के पिता शिव और माता मोहिनी हैं। समुद्र मंथन के दौरान भगवान भोलेनाथ भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार पर मोहित हो गए थे और इसी के प्रभाव से एक बच्चे का जन्म हुआ। जिसे उन्होंने पंपा नदी के तट पर छोड़ दिया। इस बच्चे का पंडालम के राजा राजशेखरा ने 12 साल तक पालन किया।

एक बार स्वामी अयप्पा अपनी माता के लिए शेरनी का दूध लाने जंगल गए और वहां पर अयप्पा स्वामी ने महिषासुर की बहन राक्षसी महिषि का भी वध किया था, क्योंकि वह राक्षसी अयप्पा स्वामी से विवाह करना चाहती थी। महिषी के वध के बाद भगवान अयप्पा ने पहाड़ों पर जाकर ध्यान किया था।

पर्व के दौरान  नित्य पूजा अर्चना हुई। इसमें सुबह 5 बजे पल्लियुनरतल इसके बाद हरिनाम कीर्तन, निरमाल्यम, श्री गणेश पूजन एवं हवन, उषापूजा, अभिषेक, हार धारण, पूजा-अर्चना, दोपहर की पूजन, संध्या पूजन और दीप आराधना, भजन-कीर्तन, कपूर आराधना और प्रसाद वितरण हुआ।

कल दिनांक 22/01/ 2023 को सेक्टर- 2 स्थित श्री अय्यप्पा मंदिर में उत्साह के अंतिम दिन सामूहिक भोजन का आयोजन किया गया साथ ही  बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किये  जिसमे  सेक्टर -7 पार्षद लक्ष्मीपति राजू  की उपस्थिति रही | दर्शन बाद प्रसादी ग्रहण किया भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया |