सेक्टर 2 भिलाई में न्यू आजाद गणेश उत्सव समिति द्वारा पधारे गये गणेश जी
भिलाई - हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सेक्टर 2 भिलाई में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की गई गणेश जी की छवि देखते ही बन रही है साथ ही साथ इस गणेश पंडाल की सजावट भी अद्वितीय है भिलाई स्थित सेक्टर 2 लोगो के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है न्यू आजाद गणेश उत्सव समिति द्वारा गणेश जी की प्रतिमा स्थापित किये गये है |
भिलाई शहर के सेक्टर 2 में इस बार 11 वीं शताब्दी के भगवन गणेश की प्रतिमूर्ति स्थापित की जाएगी यह प्रतिमूर्ति दंतेवाड़ा में ढोलकल पहाड़ी पर स्थापित भगवन गणेश की प्राचीन मूर्ति के दर्शन नही कर पाते है ऐसे में समिति द्वारा इस वर्ष प्रभु की प्रतिमूर्ति स्थापित करने का निर्णय लिया है जे.श्रीनिवासराव के इस मूर्ति से जुड़े इतिहास की जानकरी देते हुए बताया की छ.ग. के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा क्षेत्र में 3000 फीट ऊँची पहाड़ी पर एक प्राचीन गणेश जी की प्रतिमा स्थावित है ढोलकल की पहाड़ियों पर स्थापित 6 फिट ऊंची 21/2 फीट चौड़ी ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित यह प्रतिमा 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थापित है! गणेश जी की यह प्रतिमा सैकड़ों साल पुरानी है! एक अद्भुत प्रतिमा को नागवंशी राजाओं द्वारा स्थापित किया गया था! एक भव्य मूर्ति को लेकर आज भी रहस्य बना हुआ है! वास्तुकला की दृष्टि से देखा जाए तो यह मूर्ति कलात्मकता का प्रतीक है! गणपति जी की इस प्रतिमा में ऊपरी दाएं हाथ में फरसा, ऊपरी बाएं हाथ में टूटा हुआ एक दंत, नीचे दाएं हाथ में अभय मुद्रा में अक्षमाला धारण किए हुए हैं वही मूर्ति के नीचे बाए हाथ में मोदक धारण किए हैं! यह रहस्य में अद्भुत प्रतिमा एक आयुध के रूप में विराजित है! पुरातत्वविदों का कहना है कि ऐसी प्रतिमा पूरे बस्तर क्षेत्र में कहीं नहीं देखी गई है! सेक्टर 2 पंडाल में 11 वीं शताब्दी के भगवान गणेश की यही प्रतिमूर्ति रखी जाएगी !
(गणेश जी के एक दांत टूटने के संदर्भ में यह कथा) - श्री निवास राव ने बताया कि यह कथा प्रचलित है कि भगवान गणेश और परशुराम का युद्ध शिखर पर हुआ था दक्षिण बस्तर के भोगामी आदिवासी परिवार अपनी उत्पत्ति ढोल कट्टा (ढोलकल) की महिला पुजारी से मानते हैं यह युद्ध के दौरान भगवान गणेश का एक दांत टूट गया इस घटना की याद में ही छिंदक नागवंशी राजाओं ने शिखर पर गणेश की प्रतिमा स्थापित की क्योंकि परशुराम के से गणेश जी का दांत टूटा था इसीलिए पहाड़ी की शिखर के नीचे के गांव का नाम फरसपाल रखा! पुरातत्ववेतायो के अनुसार ढोल कल शिखर पर स्थापित दुर्लभ गणेश प्रतिमा 11वीं शताब्दी की बताई जाती है यह प्रतिमा ललितासन मुद्रा में विराजमान है |
सेक्टर 2 न्यू आजाद गणेश उत्सव समिति