संघ लोक सेवा आयोग(UPSC) ने 2021 की परीक्षा के परिणाम जारी कर दिए हैं। कुल 749 पदों में से छत्तीसगढ़ की श्रद्धा शुक्ला की 45वीं रैंक आई है। यह प्रदेश के किसी सिविल सेवा अभ्यर्थी की अब तक की सबसे अच्छी रैंक बताई जा रही है। श्रद्धा शुक्ला कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला की बेटी हैं। दैनिक भास्कर ने श्रद्धा से उनके सफर और सफलता पर बातचीत की।
श्रद्धा शुक्ला ने बताया, उनका यहां तक का सफर थोड़ा मुश्किल था, लेकिन परिवार, पेरेंट्स और दोस्तों की सपोर्ट से थोड़ा ईजी हो गया। मैंने रायपुर में ही रहकर सारी प्रीपरेशन की है। रायपुर के गवर्नमेंट डीबी गर्ल्स कॉलेज से बीएससी और एमएससी किया है। ग्रेजुएशन के साथ ही एक स्थानीय कोचिंग में यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। बाद में कलेक्टिव एफर्ट से ग्रुप स्टडी शुरू की। यह मेरा थर्ड अटेम्प्ट था। पिछले अटेम्प्ट में इंडियन पोस्ट एंड टेलिकॉम अकाउंट एंड फाइनेंस सर्विसेज एलॉट हुआ था। उसकी ट्रेनिंग चल रही है। मैं लीव लेकर यहां आई हूं।
रायपुर में तैयारी की चुनौतियों से जुड़े एक सवाल पर श्रद्धा ने कहा, रायपुर में तैयारी की सबसे बड़ी अड़चन मेंटल थी। लोग कहते थे कि यहां से तैयारी नहीं हो पाती। यह सबसे बड़ी बाधा है। वह हट जाए तो चीजें आसान हो जाएंगी। यहां रिसोर्सेज हैं। ऑनलाइन भी चीजें मौजूद हैं। उतनी तकलीफ नहीं है। बस एक मेंटल ब्लॉकेज है कि यहां रहकर होता नहीं है। बाकी कुछ समस्या नहीं है। रायपुर में बहुत अच्छा माहौल है। मैंने पढ़ाई एमएससी इन फिजिक्स की है, लेकिन UPSC में ऑप्शनल जिओग्राफी था।
श्रद्धा ग्रेजुएशन के दौरान ही यह तय कर चुकी थीं कि उन्हें सिविल सर्विसेज में जाना है।
फेलियर का डर तो इस बार भी था
श्रद्धा बताती हैं, इस बार भी फेलियर का डर तो था ही। हालांकि मेरा टारगेट था कि अंतिम सूची के टॉप 50 में जगह बनानी है। प्रिपरेशन कर रहे थे तो उम्मीद तो थी ही। हो गया यह बड़ी बात है। थैंकफुल हूं मैं बहुत लकी फील कर रही हूं। पिछली बार आईएएस की फाइनल लिस्ट में मेरा नाम नहीं आया था। मुझे लगता था कि मैंने सारा एफर्ट डाल दिया है, उसके बाद भी परिणाम नहीं आए। तो वह एक चुनौती थी मेरे लिए। बाकी के लिए मेरा परिवार हमेशा मेरे साथ खड़ा रहा है। मेरे भाई-बहन हमेशा मेरे साथ रहे हैं।
घंटों में बांटा नहीं था, बस पढ़ाई करती थी
श्रद्धा कहती हैं कि सिविल सेवा की तैयारी के दौरान उनके पढ़ाई के घंटे निर्धारित नहीं थे। वे बस पढ़ती थीं, सारा दिन पढ़ती रहती थी। वे ऑनलाइन पढ़ना प्रेफर नहीं करतीं। उन्हें पेपर से ही पढ़ना पसंद है। वह बताती हैं कि उनके कई फ्रेंड्स हैं, जिनका नाम लिस्ट में है और उन्होंने ऑनलाइन ही पढ़ाई की है।
घर पर बधाई देने वालों का तांता
रायपुर में मोवा ओवरब्रिज के पास सुशील आनंद शुक्ला का घर है। सोमवार दोपहर से उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। कांग्रेस के पदाधिकारी, अफसर, नगर निगम के पार्षद और मीडिया से जुड़े लोग उनके यहां पहुंचते रहे। बिटिया की सफलता की सुनकर बहुत से रिश्तेदार भी घर पहुंच गए थे। वहां उत्सव सा माहौल था, सभी श्रद्धा की सफलता को एंजॉय करते दिखे।