19 मई 2022
भिलाई नगर निगम पेयजल के नाम पर लोगों को बीमारी पिला रहा है। यह वहां के लोग नहीं बल्कि खुद निगम द्वारा दी गई वाटर टेस्ट वायल का रिजल्ट बता रहा है। यह जानते हुए भी कि टेस्ट में पेयजल सैंपल फेल हो गया है निगम वही पानी लोगों को सप्लाई कर रहा है। इस भीषण गर्मी में पानी की किल्लत के चलते लोग जानते हुए भी बीमारी फैलाने वाला कीटाणु युक्त पानी पीने को मजबूर हैं।
वार्ड की महिलाएं
साफ और पर्याप्त पानी सप्लाई का दावा करने वाले निगम की सच्चाई का पता करने के लिए की टीम खुद ग्राउंड पर गई। वहां उन्हें चौंकाने वाली सच्चाई दिखी। टीम पानी की समस्या का पता लगाने के लिए भिलाई नगर निगम के वार्ड 38 अंतर्गत रेलवे पटरी के किनारे बसे झुग्गी क्षेत्र पहुंची। शहीद वीर नारायण सिंह वार्ड के इस क्षेत्र में आज भी बोर के द्वारा पानी सप्लाई किया जाता है। यहां के लोगों से जब पानी की समस्या को लेकर बात की गई तो देखते ही देखते दर्जनों की संख्या में महिलाएं आ गईं। इन महिलाओं के हाथ में एच2एट टेस्ट वायल था।
इस वायल में एकदम काला तरल पदार्थ भरा हुआ था। जब इस वायल के निर्देशों को पढ़ा गया तो चौंकाने वाली सच्चाई पता चली। वायल के अंदर बोर से सप्लाई होने वाले पानी को भरा गया था जो 24 घंटे में काला हो गया। इसका मतलब यह है कि वार्ड के लोग जिस पानी को साफ पानी समझ कर पी रहे हैं, दरअसल वह बीमारी पी रहे हैं। यह पानी टेस्ट के मुताबिक जीवाणु युक्त और हानिकारक है। महिलाओं का कहना था निगम के अधिकारियों इस टेस्ट की जानकारी दी गई, लेकिन उन्होंने इसे ठीक करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
नालियों से गुजरी पेयजल पाइप लाइन
पानी को लेकर वार्ड में हाहाकर
वार्ड 38 की महिलाओं से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनके यहां गंदा पानी सप्लाई किया जा रहा है, वह भी इतना कम कि पानी के लिए कई बार झगड़ा तक होता है। वार्डवासी सीमा ने बताया कि पानी की समस्या बहुत दिनों से है। जब शिकायत करते हैं तो निगम पानी को टेस्ट करता है। पानी का सैंपल इससे पहले भी फेल हो चुका है, लेकिन निगम ने उसे ठीक नहीं किया। इससे यहां के लोग खराब पानी पीने को मजबूर हैं। वहीं गीता पटेल का कहना है कि मोहल्ले में पानी की काफी समस्या है। पानी आता है, लेकिन किसी को मिलता है किसी को नहीं मिलता है। पानी के लिए लड़ाई तक होती है।
बोर का पानी जो देखने में साफ, लेकिन टेस्ट में हानिकारक
बोर से आ रहा गंदा पानी
मुराद बेगम और विषमती साहू का कहना है कि उनके मोहल्ले में बोर से पानी सप्लाई दिया जाता है। यह पानी देखने में तो साफ है, लेकिन जब निगम की टेस्ट किट से जांच की गई तो यह पानी एकदम काला और गंदा हो गया। इसे देखकर मोहल्ले के लोग काफी डरे हुए हैं। मोहल्ले में पानी की काफी समस्या है। इसके चलते जानते हुए भी बीमारी फैलाने वाला गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।
गंदा पानी पीकर बच्चे हो रहे बीमार
यहां की निवासी नसीमा बानो का कहना है कि निगम की जिम्मेदारी है कि वह साफ पानी सप्लाई करे। यहां काफी दिनों से गंदा व गुणवत्ताहीन पानी सप्लाई हो रहा है। छोटे-छोटे बच्चे इस पानी को पीकर बीमार हो रहे हैं। जल है तो जीवन है की सीख देने वाला निगम ही गंदा पानी सप्लाई कर रहा है।
पार्षद ने किया था जोन कार्यालय का घेराव
यहां के पार्षद पीयुष मिश्रा से जब इस बारे में की गई तो उन्होंने कहा कि निगम के अधिकारी गंदा पानी सप्लाई की बात को जान रहे हैं। वार्ड में कई इलाकों में पानी की किल्लत है। नालियों से होकर पाइप लाइन जा रही है, उसे ठीक नहीं किया जा रहा है। लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हो रहे हैं। इन सभी समस्या को को पार्षद ने निगम आयुक्त व जोन आयुक्त के सामने रखा था। इसके बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने मोहल्ले की महिलाओं व लोगों को लेकर जोन कार्यालय का घेराव किया था। पार्षद का आरोप है कि निगम के अधिकारी ऐसा राजनीतिक व प्रशासनिक दबाव के चलते कर रहे हैं। पार्षद ने इसे लेकर जल्द ही उग्र आंदोलन करने की बात भी कही है।
एच2 एस वायल किट
क्या है एच2 एस टेस्ट वायल
एच 2 एस टेस्ट वायल निगम के द्वारा मितानिन को दिया जाता है। यह एक छोटी शीशी में होता है। इसके अंदर पहले से दवा पड़ी होती है। इससे पानी की गुणवत्ता को टेस्ट किया जाता है। इससे टेस्ट करने के लिए अपने हाथों को साबुन से अच्छे से धोना होता है। इसके बाद वायल को खोलकर उसमें 20 मिली लीटर पानी को भरना होता है। पानी को 24 से 48 घंटे तक रखना होता है। यदि इस अवधि में पानी का सैंपल काला हो जाता है तो वह पानी जीवाणु युक्त यानि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
दूर करेंगे समस्या
इस मामले में भिलाई नगर निगम के आयुक्त प्रकाश सर्वे का कहना है की यदि ऐसा तो पता करवा लेता हूं। यदि ख़राब पानी आने या पानी की किल्लत की समस्या है तो इसे दूर किया जाएगा.