प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन मई में मुलाकात करेंगे/। दोनों नेता 24 मई को जापान में होने वाले क्वाड शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले हैं। हालांकि, जापान की ओर से बैठक के एजेंडे को लेकर कोई भी खुलासा नहीं किया गया है।
सितंबर 2021 में मोदी और जो बाइडेन के बीच आखिरी व्यक्तिगत मुलाकात व्हाइट हाउस में हुई, जब PM मोदी क्वाड देशों की समिट में हिस्सा लेने वॉशिंगटन गए थे। इस सम्मेलन में क्वाड के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी शामिल होंगे।
2+2 बैठक के दौरान दोनों नेताओं की वर्चुअल मुलाकात
इससे पहले 2+2 बैठक के दौरान दोनों नेताओं की वर्चुअल मुलाकात हुई थी। बाइडेन ने PM नरेंद्र मोदी से यूक्रेन पर हमले के चलते रूस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के बीच रूस से तेल और गैस न खरीदने की बात दोहराई थी।
दो महीने पहले हुई क्वाड नेताओं की वर्चुअल मीटिंग
दो महीने पहले क्वाड नेताओं की वर्चुअल मीटिंग हुई। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और जापानी प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा भी मौजूद थे। बैठक में यूक्रेन और रूस मामले पर, हिंद महासागर क्षेत्र और प्रशांत द्वीप समूह में विकास सहित अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
बाइडेन का साउथ कोरिया दौरा
बाइडेन 20 से 22 मई तक दक्षिण कोरिया की यात्रा करेंगे। इसके बाद वह 23 मई को जापान पहुंचेंगे और 24 मई को टोक्यो में क्वाड शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने बुधवार को कहा कि यह यात्रा स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए बाइडेन-हैरिस प्रशासन की ठोस प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाएगी।
QUAD क्या है?
QUAD यानी क्वॉड्रिलैटरल सिक्योरिटी डॉयलॉग चार देशों का समूह है। इसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान शामिल हैं। इन चारों देशों के बीच समुद्री सहयोग 2004 में आई सुनामी के बाद शुरू हुआ था। QUAD का आइडिया 2007 में जापान के उस वक्त के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने दिया था। हालांकि, चीन के दबाव में ऑस्ट्रेलिया पहले ग्रुप से बाहर रहा।
दिसंबर 2012 में शिंजो आबे ने फिर से एशिया के डेमोक्रेटिक सिक्योरिटी डायमंड का कॉन्सेप्ट रखा, जिसमें चारों देशों को शामिल कर हिंद महासागर और पश्चिमी प्रशांत महासागर के देशों से लगे समुद्र में फ्री ट्रेड को बढ़ावा देना था। आखिरकार नवंबर 2017 में चारों देशों का QUAD ग्रुप बना।
QUAD का उद्देश्य
इसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक के समुद्री रास्तों पर किसी भी देश, खासकर चीन, के दबदबे को खत्म करना है। आज ये सभी लोकतंत्रिक देश सुरक्षा, अर्थव्यसव्था और स्वास्थ्य के मुद्दों एक व्यापक एजेंडे पर काम करते हैं।
- भारत के लिए चीन की बढ़ती सैन्य और आर्थिक ताकत स्ट्रैटजिक चुनौती है। चीन ने दक्षिण चीन सागर में द्वीपों पर कब्जा कर लिया है और वहां मिलिट्री असेट्स डेवलप किए हैं। चीन हिंद महासागर में ट्रेड रूट्स पर अपना असर बढ़ाने की कोशिश भी कर रहा है, जो भारत के लिए चिंता बढ़ाने वाला है।
- अमेरिका की पॉलिसी पूर्वी एशिया में चीन को काबू करने की है। इसी वजह से वह QUAD को इंडो-पैसिफिक रीजन में फिर से दबदबा हासिल करने के अवसर के तौर पर देखता है। अमेरिका ने तो अपनी नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटजी में रूस के साथ-साथ चीन को भी स्ट्रैटजिक राइवल कहा है।
- ऑस्ट्रेलिया को अपनी जमीन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, पॉलिटिक्स में चीन की बढ़ती रुचि और यूनिवर्सिटीज में उसके बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता है। चीन पर निर्भरता इतनी ज्यादा है कि उसने चीन के साथ कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप जारी रखी है।
- जापान पिछले एक दशक में चीन से सबसे ज्यादा परेशान रहा है, जो अपना अधिकार क्षेत्र बढ़ाने के लिए सेना का इस्तेमाल करने से भी नहीं झिझक रहा। अहम ये है कि जापान की इकोनॉमी एक तरह से चीन के साथ होने वाले ट्रेड वॉल्यूम पर निर्भर है। इस वजह से जापान चीन के साथ अपनी आर्थिक जरूरतों और क्षेत्रीय चिंताओं में संतुलन साध रहा है।