विश्व मलेरिया दिवस : टॉप-5 मलेरिया संक्रमित जिलों में शामिल दुर्ग में मलेरिया का असर तेजी से कम हुआ है

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भिलाई २५ अप्रैल 

दुर्ग अब मलेरिया फ्री जिला हो चुका है। वर्ष 2016 तक प्रदेश के टॉप-5 मलेरिया संक्रमित जिलों में शामिल दुर्ग में मलेरिया का असर तेजी से कम हुआ है। इससे पहले तक मलेरिया के 2 हजार से ज्यादा नए केस मिल रहे थे, अब नए केस की सालाना संख्या 150 तक सिमट गई है। सरकारी आंकड़ों में नए केस संख्या में यह गिरावट 2017 से शुरू हुई। इसके बाद से निरंतर कम होते गई है। इस मामले में जिले के निजी अस्पतालों व पैथालॉजी सेंटरों के आंकड़े भी सरकारी सेंटरों के आंकड़ों एक जैसे हैं। पैथोलॉजी सेंटरों में 3 महीने में अधिकतम 3500 टेस्ट करने पर मात्र 3 संक्रमित मिले हैं। इस प्रकार 10 वर्षों से केस कम होते गए हैं।


मलेरिया मुक्त होने की 3 प्रमुख वजह

1. साफ-सफाई और सजगता
वर्ष 2018 में डेंगू के तांडव के बाद पूरे जिले को समझ में आ गया कि साफ-सफाई ही मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी बीमारी से बचा जा सकता है।

2. शीघ्र जांच और आइसोलेशन
डेंगू के प्रकोप के बाद से हर बुखार को लोग डेंगू या मलेरिया मानने लगे हैं। बुखार आया नहीं कि सरकारी सेंटरों पर जांच कराने पहुंच जा रहे हैं।

3. एक्टिव रहने लगे जिम्मेदार
डेंगू के प्रकोप ने सरकारी व निजी अमला को इस कदर झकझोरा कि सभी 12 महीने रोकथाम के लिए एक्टिव हो गए हैं। बारिश के सीजन में जागरूकता बढ़ी है।

कैसे निकाला जाता है एरिया पॉजिटिव इंडेक्स, जानिए
एरिया पॉजीटिव इंडेक्स निकालने के लिए सबसे पहले मिले पॉजिटिव केस की संख्या में 1000 से गुणा किया जाता है। गुणा करने पर जितनी संख्या आती है, उसमें उस क्षेत्र की जनसंख्या में भाग देते हैं। प्राप्त संख्या ही वहां की एरिया पॉजीटिव इंडेक्स होती है। दुर्ग का एपीआई पिछले 5 वर्ष से 1 के नीचे हैं।

कैसे निकाला जाता है एरिया पॉजिटिव इंडेक्स, जानिए
एरिया पॉजीटिव इंडेक्स निकालने के लिए सबसे पहले मिले पॉजिटिव केस की संख्या में 1000 से गुणा किया जाता है। गुणा करने पर जितनी संख्या आती है, उसमें उस क्षेत्र की जनसंख्या में भाग देते हैं। प्राप्त संख्या ही वहां की एरिया पॉजीटिव इंडेक्स होती है। दुर्ग का एपीआई पिछले 5 वर्ष से 1 के नीचे हैं।

दुर्ग संभाग में केवल राजनांदगांव और कवर्धा में केस ज्यादा
दुर्ग संभाग में राजनांदगांव व कवर्धा में ही मलेरिया के नए केस एपीआई रेट से ज्यादा मिले हैं। दुर्ग, बेमेतरा और बालोद में संख्या बिल्कुल कम हो गई है। दुर्ग जिले को मलेरिया मुक्त मान लिया गया है। क्योंकि पिछले पांच वर्षों से वहां मलेरिया के नए केस मिलना बिल्कुल कम हो गया है। इस वजह से दुर्ग को मलेरिया फ्री जिला माना गया है। मलेरिया का संक्रमण जिले में नहीं है। हम नजर बनाए हुए हैं।
-डॉ. सुभाष मिश्रा, संचालक, महामारी नियंत्रण, छ.ग