राजनांदगांव २२ अप्रैल
बीहड़ जंगल में बसे गांवों में आज भी शिक्षा के प्रति पालकों में जागरूकता की कमी है पर इन अभावग्रस्त क्षेत्रों में ऐसे शिक्षक भी पदस्थ हैं जो कि गरीबी और तंगहाली में जीने में बच्चों की किस्मत बदलने का काम कर रहे हैं। मानपुर-मोहला-अंबागढ़ चौकी जिले के धुर नक्सल प्रभावित गांव दुलकी प्राथमिक शाला में अध्ययनरत बच्चों की पढ़ाई का स्तर देखकर आप समझ जाएंगे कि यहां स्कूली पढ़ाई के अलावा बच्चों को किस तरह प्रतियोगी परीक्षाओं के किस तरह तैयार किया जा रहा है।
गांव के 27 बच्चों के लिए केवल एक शिक्षक पदस्थ है पर इस शिक्षक ने अवकाश के दिनों में भी पढ़ाई कराई और प्रवेश परीक्षाओं की ऐसी तैयारी कराई कि इस गांव की कक्षा पांचवीं की छात्रा सुन्ती ने एकलव्य आवासीय प्रवेश परीक्षा में जिलेभर में टॉप किया। इसी स्कूल की देवंतीन दूसरे नंबर पर रही और छात्र मनीष कुमार जिलेभर में तीसरे नंबर पर आए। यहां पदस्थ शिक्षक डीएस नायक जब रविवार या फिर अन्य सरकारी अवकाश के दिन बच्चों को स्कूल बुलाकर पढ़ाई कराते थे और प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराते थे तो पालक विरोध करते और बच्चों को घरेलू कामकाज के लिए बुला लेते थे।
अब जागरूक हो रहे पालक
शिक्षक को पालकों की नाराजगी सहनी पड़ती थी पर अब जब गांव के बच्चे एकलव्य आवासीय स्कूल और उत्कर्ष स्कूल की प्रवेश परीक्षा में स्थान बनाने लगे हैं तब पालक पढ़ाई को लेकर जागरूक नजर आ रहे हैं। शिक्षक नायक ने बताया कि इस वर्ष एकलव्य आवासीय प्रवेश परीक्षा में तीन बच्चे जिले में टॉप पर रहे हैं तो वहीं कुल 6 बच्चों को एकलव्य के लिए चयन हुआ है। ये बच्चे सरकारी योजना के तहत सुविधाओं के बीच नि:शुल्क में आगे की पढ़ाई करेंगे।
ऐसा है पढ़ाई का स्तर
इस स्कूल के बच्चे हर साल आवासीय स्कूल की प्रवेश परीक्षा में चयनित हो रहे हैं और बाहर जाकर बेहतर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यह देखकर पालकों को जागरूकता आई है और बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए 15 दिन के भीतर टेस्ट परीक्षा लेते हैं। इसी का नतीजा है कि पहली के बच्चे दूसरी और तीसरी की किताब तक पढ़ लेते हैं। पहली के बच्चे गुणा-भाग करना भी सीख गए हैं। टेस्ट लेने से बच्चों में उत्साह बढ़ा है।
स्कूल परिसर में तैयार किया किचन गार्डन
इस स्कूल परिसर में बच्चों ने ही किचन गार्डन तैयार किया है जहां अलग-अलग तरह की सब्जियां और फूल के पौधे लगाए गए हैं। सब्जी के तैयार होने पर बच्चे बारी-बारी से अपने घर लेकर भी जाते हैं। वहीं मध्याह्न भोजन में इसी किचन गार्डन कर सब्जियां बनाई जाती है। बच्चे स्वयं इस गार्डन की देखरेख करते हैं। इस गार्डन के माध्यम से बच्चों को पर्यावरण के साथ कृषि के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।