धान खरीदी केंद्रों में धान का उठाव नहीं होना' और मिलान में गड़बड़ी करना समिति प्रबंधकों को महंगा पड़ने वाला है। समिति प्रबंधकों के साथ-साथ इस गड़बड़ी की वजह से अनुभाग के एसडीएम के भी इंक्रीमेंट रोके जाएंग
प्रशासन की ओर से यह सख्ती बरती जाने वाली है। कारण यह है कि 149 सोसाइटियों में से 74 ऐसी सोसाइटियां हैं जहां इस तरह की गड़बड़ी सामने आई है। अफसरों की मानें तो 37 हजार क्विंटल धान का शार्टेज पाया गया है। मामले में समिति प्रबंधकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
एक अनुमान के मुताबिक शार्टेज वाले धान की कीमत करीब 9 करोड़ 25 लाख रुपए है। खरीफ सीजन में 149 सोसाइटियों के माध्यम से 82 लाख 51 हजार क्विंटल धान की खरीदी की गई थी। धान की खरीदी के बाद मिलर्स ने धान का उठाव किया वहां संग्रहण केंद्रों में भी धान भेजा गया।
गड़बड़ी अब जाकर सामने आ रही है जब 37 हजार क्विंटल का शार्टेज सामने आ रहा है। जबकि इस सीजन में बारिश भी नहीं हुई और समिति के द्वारा सूखत बताया जा रहा है। मिलान नहीं होने के बाद प्रशासन अब सख्ती के मूड में है। इस वजह से समिति प्रबंधकों को हिदायत दी गई है। इसमें 75 सोसाइटियों में तो 0 शार्टेज है लेकिन शेष 74 सोसाइटियों में कार्रवाई की तलवार लटक रही है। इसकी वजह से हड़कंप मची हुई है।
साठगांठ कर शॉर्टेज बता बोगस एंट्री करवाई गई
पूर्व में शासन के द्वारा 7 से 8 प्रतिशत शार्टेज मान लिया जाता था। इस वजह से समिति प्रबंधकों के द्वारा किसानों के साथ साठगांठ करके बोगस इंट्री करवाई गई। अब 0 प्रतिशत शार्टेज की वजह से सोसाइटी प्रबंधकों को करोड़ों का भुगतान करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति राजनांदगांव अनुभाग के आधा दर्जन सोसाइटियों में ज्यादा देखने मिल रही है।
कई सोसाइटियों में धान का एक दाना भी नहीं है
जिले के प्रत्येक अनुभाग में ऐसी कुछ सोसाइटियां हैं जहां धान का एक दाना नहीं है। जबकि यहां अभी भी धान उठाना शेष है। इनका डीओ भी जारी हो चुका है। मिलर्स के पास डीओ है लेकिन सोसाइटी में धान ही नहीं है। इस तरह की कहीं न कहीं बड़े स्तर पर गड़बड़ी को अंजाम दिया गया है। इस वजह से प्रशासन अब इस मामले में कार्रवाई की तैयारी में है।
इस मामले को लेकर सख्ती बरत रहा प्रशासन
इस संबंध में 74 ऐसी सोसाइटियां हैं जहां 37 हजार क्विंटल धान का शॉर्टेज है। समिति प्रबंधकों को हिदायत दी गई है। जल्द ही ऐसे प्रबंधकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। गड़बड़ी के इस गंभीर मामले में उन्हें जेल भी भेजा जा सकता है। प्रशासन इस मामले को लेकर सख्ती बरत रहा है।