राजनांदगांव: आज छत्तीसगढ़ में भाजपा जो 14 सीटों मे सिमटकर रह गई है.. उसका प्रमुख कारण डॉ. रमनसिंह की राजनीतिक महात्वाकांक्षा एवं उनकी भाई भतीजे वाद की नीति रही है । उन्होंने भाजपा के कर्मठ नेताओं व कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर अपने चाटूकारों को महत्व दिया और देते आ रहे हैं । जिसने भी पार्टी हित मे रमनसिंह की गलत नीतियों का विरोध किया, उसे धीरे से दरकिनार कर दिया गया । उनके शिकार बने स्व. ताराचंद साहू जी, ननकी राम कंवर जी, देवजी भाई पटेल, नंद कुमार साय, बलीराम कश्यप, युध्दवीर सिंह जूदेव, डॉ. विमल चोपड़ा, रजिन्दर पाल सिंह भाटिया,विनोद खांडेकर,तरुण हथेल, विरेन्द्र पाण्डेय आदि दिग्गज नेता ।
सूत्रों की माने तो डॉ. रमनसिंह एण्ड कम्पनी कभी नहीं चाह रहे थे कि राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र से संतोष पाण्डेय जीते । इसी धारणा के तहत इनकी कम्पनी राजनांदगांव लोकसभा मे निष्क्रिय बनी रही । वो तो मोदीजी की लोकप्रियता एवं RSS के कार्यकर्ताओं की मेहनत रंग लाई और संतोष पाण्डेय ने जीत दर्ज की । चूंकि रमन सिंह राजनांदगांव से अपने पुत्र को पुन: टिकट दिलवाना चाह रहे थे, किन्तु केन्द्रीय नेतृत्व ने संतोष पाण्डेय को टिकट दिया , तो डॉ. रमनसिंह एण्ड कम्पनी को यह बर्दाश्त नहीं हुआ और पूरे चुनाव भर लगभग निष्क्रिय बैठे रहे । और अब संतोष पाण्डेय जी की आमजनों के बीच बढ़ती लोकप्रियता को पचा नहीं पा रहे हैं । इसलिए डॉ. रमनसिंह एण्ड कम्पनी संतोष पाण्डेय के खिलाफ भ्रमक प्रचार कर उन्हें दरकिनार करने का प्रयास कर रही है।
खैर हमें क्या.. लेकिन अगर भाजपा को छत्तीसगढ़ मे पुन: सत्ता स्थापित करनी है, तो रमनसिंह एण्ड कम्पनी का पर कतरना पड़ेगा । जिन्हें जनता ने बुरी तरह नकारा हो और वही सर्वेसर्वा बने रहे, तो छत्तीसगढ़ में 2023 मे भाजपा का पुनः आना एक सपना ही साबित होगा ।