पिछले दिनों खबर आई कि उत्तराखंड की 78 साल की एक महिला ने अपनी पूरी प्रॉपर्टी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के नाम कर दी। बुजुर्ग महिला राहुल गांधी के विचारों से काफी प्रभावित हैं। इसलिए उन्होंने अपनी प्रॉपर्टी उनके नाम कर दी।
पुष्पा देहरादून में रहती हैं। अपनी प्रॉपर्टी का मालिकाना हक राहुल गांधी के नाम करते हुए उन्होंने देहरादून कोर्ट में एक वसीयतनामा भी पेश किया है।
कितनी संपत्ति थी?
- 50 लाख की प्रॉपर्टी
- 10 तोला सोना
पुष्पा ताे विचारों से प्रभावित थीं, लेकिन बहुत से ऐसे बुजुर्ग हमारे देश में हैं, जिनके विचार अपने ही बच्चों से नहीं मिलते। बच्चे संपत्ति तो चाहते हैं, लेकिन माता-पिता के साथ रहना नहीं चाहते। यही वजह है कि वे अपनी प्रॉपर्टी जरूरतमंदों को या फिर उन्हें देना चाहते हैं, जिन्हें पैसे की जरूरत है या इंसानियत की कद्र।
इस खबर ने कई बुजुर्गों को इस बात की हिम्मत दी कि अगर बच्चे उनकी इज्जत नहीं करते, उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते हैं तो वे भी अपनी संपत्ति दूसरों के नाम कर सकते हैं।
चलिए जानते हैं आखिर कैसे आप अपनी प्रॉपर्टी किसी के भी नाम कर सकते हैं।
संपत्ति से जुड़े तमाम सवालों का जवाब जानने के लिए हमने बात कि प्रॉपर्टी लॉ एक्सपर्ट एडवोकेट सुभाष चंद्रा से...
सवाल- प्रॉपर्टी कितने प्रकार की होती है?
जवाब- प्रॉपर्टी दो तरह की होती है।
- Movable Property (चल सम्पत्ति) - वह संपत्ति, जिसे हम एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकते हैं। जैसे- पैसा, जूलरी, बर्तन, घर का सामान। ऐसी प्रॉपर्टी को Movable Property कहते हैं।
- Immovable property (अचल सम्पत्ति) - वह संपत्ति, जिसे हम एक जगह से दूसरी जगह नहीं ले जा सकते हैं। जैसे- जमीन, घर, प्लाॅट। ऐसी प्रॉपर्टी को Immovable property कहते हैं।
कुछ बच्चों को लगता है कि माता-पिता की प्रॉपर्टी और दादा-दादी की प्रॉपर्टी, दोनों पर ही उनका हक है, लेकिन ऐसा नहीं है। दोनों प्रॉपर्टी अलग-अलग है। इसे इस तरह से समझते हैं...
माता-पिता की प्रॉपर्टी- इसे स्व-अर्जित संपत्ति भी कहते हैं। ऐसी प्रॉपर्टी को माता-पिता अपनी खुद की कमाई से खरीदते हैं। ऐसी प्रॉपर्टी को माता-पिता जिसे चाहें उसे दे सकते हैं। या फिर बच्चों को अपनी प्रॉपर्टी से बेदखल भी कर सकते हैं। जरूरी नहीं की वह बच्चों को ही दें। अगर माता-पिता ने अपने निधन से पहले ये प्रॉपर्टी किसी के नाम नहीं की है तो इसमें बेटे और बेटी का एक समान अधिकार होता है।
दादा-दादी की प्रॉपर्टी- इसे पुश्तैनी संपत्ति भी कहते हैं। अगर दादा-दादी के नाम कोई प्रॉपर्टी है तो उसमें नाती, पोता, पोती या नातिन का बराबर हक होता है। अगर पुश्तैनी प्रॉपर्टी बेची जाती है या उसका बंटवारा होता है तो बेटियों को भी उसमें हिस्सा मिलेगा। एक बार अगर पुश्तैनी प्रॉपर्टी का बंटवारा हो गया तो हर उत्तराधिकारी को मिला हिस्सा उसकी खुद कमाई हुई प्रॉपर्टी बन जाएगी।
कई बार माता-पिता परिवार और बच्चों के बुरे व्यवहार से परेशान हो जाते हैं और अपनी प्रॉपर्टी दान करने का मन बना लेते हैं। ऐसे में उन्हें समझ नहीं आता की वो क्या करें। तो चलिए हम आपको बताते हैं प्रॉपर्टी को दान करने के लिए किन बातों का होना जरूरी है।
सवाल- किस कानून की तहत आप अपनी प्रॉपर्टी दान कर सकते हैं?
जवाब- हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई
संपत्ति अन्तरण अधिनियम, 1882 की धारा 122 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति अपनी प्रॉपर्टी दान कर सकता है।
सवाल- प्रॉपर्टी दान करने की शर्तें क्या-क्या हैं?
जवाब-
- दान देने वाला और दान लेने वाला, दोनों व्यक्ति का जीवित रहना जरूरी है।
- अपनी प्रॉपर्टी अपनी इच्छा से दान करनी होगी।
- जिसे प्रॉपर्टी दान की जा रही है, उससे पैसा या कोई कीमती चीज न लें।
- दान देना काफी नहीं है। दान लेने वाले व्यक्ति की स्वीकृति भी जरूरी है।
जरूरी बात- अगर आपने प्रॉपर्टी दान कर दी और दान लेने वाला व्यक्ति उसे एक्सेप्ट ( स्वीकार) करने से पहले मर गया तो आपकी प्रॉपर्टी उस व्यक्ति को दान नहीं होगी।
कई बार बच्चों को लगता है कि उनके माता-पिता ने भले ही अपनी प्रॉपर्टी किसी और के नाम कर दी है। फिर भी उस प्रॉपर्टी में उनका हक है, क्योंकि वे उनके बच्चे हैं। चलिए जानते हैं ऐसा है या नहीं।
सवाल- बुजुर्ग माता-पिता ने अपनी प्रॉपर्टी किसी और के नाम कर दी है तो क्या उनके गुजर जाने के बाद बच्चे उस पर दावा कर सकते हैं?
जवाब- अगर प्रॉपर्टी माता-पिता ने खुद की कमाई से खरीदी थी और उनके गुजर जाने के पहले तक उनका ही कब्जा था, उन्होंने अपनी वसीयत में अपनी मर्जी से किसी और के नाम उसे कर दी है। तो ऐसी स्थिति में बच्चे उस प्रॉपर्टी पर दावा कभी भी नहीं कर सकते हैं।
ये तो बात हुई हिंदुओं के कानून की। अब बात करते हैं मुस्लिम समाज के लिए प्रॉपर्टी दान का क्या कानून है।
सवाल- मुस्लिम व्यक्ति अपनी प्रॉपर्टी किस तरीके से दूसरों के नाम या दान कर सकता है?
जवाब- मुस्लिम अपनी प्रॉपर्टी कई तरह से बांट सकते हैं। वे अपनी प्रॉपर्टी गिफ्ट और वसीयत के जरिए किसी को भी दे सकते हैं। मुस्लिम कानून में गिफ्ट के जरिए देने वाली प्रॉपर्टी को हिबा के नाम से जाना जाता है।
मुस्लिम कानून में वसीयत को समझिए
- पुरुष और महिला दोनों वसीयत बना सकते हैं। एक पर्दानशीं महिला भी वसीयत बना सकती है। लेकिन एक मुस्लिम अपनी संपत्ति का एक तिहाई भाग से अधिक की वसीयत नहीं कर सकता है।
- शरीयत कानून के अनुसार एक मुस्लिम जो मानसिक तौर पर स्वस्थ हो और 18 साल या उससे अधिक का हो वह वसीयत बना सकता है।
- वसीयत मौखिक या लिखित बनाया जा सकता है। इसके लिए किसी तरह का कानून नहीं कि इसे लिखकर बनना जरूरी है। बस यह बात क्लियर होनी चाहिए कि वसीयत करने वाले के बाद प्रॉपर्टी किसकी होगी।
- जब एक मुस्लिम की मृत्यु होती है, तब मरने वाले व्यक्ति का यदि कोई कर्ज है तो उसे सबसे पहले उसके पैसे से चुकाया जाता है। उसके अंतिम संस्कार में जो खर्च होता है उसका भुगतान भी मृतक के पैसे से किया जाता है।
अब हिबा को समझिए
- हिबा यानी गिफ्ट के जरिए प्रॉपर्टी तुरंत किसी के भी नाम या दान दी जा सकती है।
- जिसे दान दे रहे हैं उस व्यक्ति का मुस्लिम होना जरूरी नहीं।
- जिसे आप प्रॉपर्टी का हिस्सा दे रहे हैं या दान दे रहे हें उसकी उम्र 18 साल से कम और ज्यादा दोनों ही हो सकती है।
- एक अजन्मे बच्चे के नाम भी हिबा कर सकते हैं, लेकिन उस बच्चे का मां के गर्भ में होना जरूरी है।
- हिबा के लिए कोई संस्था चुन सकते हैं।
हिबा के जरिए प्रॉपर्टी दूसरे व्यक्ति के नाम या दान करने की शर्तें
- जो व्यक्ति प्रॉपर्टी दान करना चाहता है उसे हिबा की घोषणा करनी होगी। मौखिक या लिखित दोनों तरीके से घोषणा की जा सकती है।
- जिस व्यक्ति के नाम प्रॉपर्टी दान की जा रही है, उसे प्रॉपर्टी एक्सेप्ट (स्वीकार) करनी होगी।
- जिस व्यक्ति के नाम प्रॉपर्टी दान की जा रही है, अगर वो दिमागी तौर से स्वस्थ्य नहीं है तो उसके पेरेंट्स भी उसे स्वीकार कर सकते हैं।