मंदराजी महोत्सव पर रवेली में रात भर सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जुड़े रहे दर्शक

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छुरिया राजनांदगांव / छत्तीसगढ़ में नाचा को सर्व प्रथम संगठित रुप देने वाले पुण्य आत्मा कलाकार दाऊ दुलार सिंह साव मंदराजी हैं,जिसे नाचा का भिष्म पितामह भी कहा जाता है। मंदराजी जी का जन्म 01 अप्रैल 1910 को संस्कारधानी राजनांदगांव जिला मुख्यालय से 05 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम रवेली के माल गुजार परिवार में हुआ था। दाऊ जी 1928 - 29 में रवेली नाचा पार्टी का गठन कर छत्तीसगढ़ में नाचा को संगठित स्वरूप प्रदान किया। चूंकि पहले खड़े साज की नाचा शैली प्रचलित थी और कोई संगठित दल के रूप में प्रस्तुति नही दिया करते थे। छत्तीसगढ़ के लोकनाट्य नाचा में पहले चिकारा लोकवाद्य का प्रयोग किया जाता था लेकिन वो दाऊ जी ही थे जिन्होंने स्वर्गीय खुमान लाल साव जी (संगीत सम्राट) के पिता जी टिकमनाथ साव जी (मंदराजी के मौसा जी) के साथ कलकत्ता से हारमोनियम लाकर नाचा में एक नये वाद्ययंत्र का समावेश किया। नाचा इतिहास में 1940-1952 तक रवेली नाचा दल की काफी धुम रही। आपके इस कला के प्रति समर्पण और साधना के उत्कृष्ट कार्य के लिए जिंदगी के आखरी बसंत में BSP द्वारा 1984 को सम्मानित किया गया था। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा छत्तीसगढ़ की लोक कला के क्षेत्र में दीर्घ साधना तथा उपलब्धियों को सम्मानित करने, मान्यता देने एवं प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय ‘दाऊ मंदराजी लोक कला सम्मान’ भी स्थापित किया गया है। सार्वा ब्रदर्स द्वारा मंदराजी के कला जीवन पर आधारित छत्तीसगढ़ का पहला बायोपिक फिल्म  मंदराजी भी बनाया गया। नाचा के लिए अपनी पूर्वजों की पूंजी तक न्यौछावर कर देने वाले कलाकार दाऊ मंदराजी के 111 वीं जयंती पर कोरोना काल के दो वर्ष के अंतराल के बाद प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी उनके गृह ग्राम रवेली में दाऊ जी और खुमान लाल साव जी को याद करते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन उनके परिवार और समस्त ग्रामवासियों की मदद से किया गया।

मंदराजी जयंती पर आयोजित इस मंदराजी महोत्सव के कार्यक्रम का अतिथियों द्वारा विधिवत शुभारंभ पश्चात इस क्रम में रात्रि 09:30 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सर्वप्रथम  खुमान साव कृत "चंदैनी गोंदा" (दीपेश साव) की प्रस्तुति दी गई जिसके साथ हजारों की संख्या में उपस्थित दर्शक झुम उठे। द्वितीय प्रस्तुति के रूप में इस आयोजन के मूल आत्मा नाचा की प्रस्तुति इस मंच के माध्यम से दी गई जिसमें बालीबुड के फिल्मों तक का सफर तय करने वाले कला साधक श्री गोविंद साव द्वारा निर्देशित नाचा दल मंदराजी नाचा पार्टी गौरव ग्राम रवेली की प्रस्तुति पारंपरिक नाचा शैली के रूप में हुई। तृतीय सांस्कृतिक प्रस्तुति के रूप में मध्य रात्रि युवा कलाकार श्री युगल किशोर साहू द्वारा संचालित सांस्कृतिक संस्था कारी बदरीया मोखा गुरुर की रंगारंग प्रस्तुति दी गई ,जो दर्शकों को अपनी ओर काफी आकर्षित किया। इस मंदराजी जयंती के अंतिम सांस्कृतिक आयोजन के रूप में छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध नाचा पार्टी राधा कृष्ण लोककला नाचा पार्टी दुर्रे बंजारी महाराष्ट्र सीमा (संचालक यश कुमार सिन्हा) की प्रस्तुति से लोग सुबह तक इन कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुति के साथ जुड़े रहे। दुर्रे बंजारी के इन कलाकारों के द्वारा नाचा को इस मंच पर एक नये कलेवर में प्रस्तुत किया गया जो दर्शकों को काफी हँसाया गुदगुदाया और अपनी ओर आकर्षित किया। इस मंच से सभी कलाकारों को कार्यक्रम की प्रस्तुति के पश्चात स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया जो इस मंच के प्रस्तुति से जुड़े कलाकारों के लिए गौरव का पल रहा। कार्यक्रम के अंतिम में सुबह आभार प्रकट के साथ ही मंदराजी जयंती पर आयोजित मंदराजी महोत्सव के इस सांस्कृतिक आयोजन का समापन किया गया। उक्त जानकारी "हमर भाखा हमर कलाकार" के संचालक दुर्गेश सिन्हा दुलरवा ने दी।