गर्मी के मौसम में हीट स्ट्रोक, फूड पॉइज़निंग से रहे सावधान : सीएमएचओ डॉ. चौधरी

त्वरित ख़बरें - रिपोर्टिंग निशा बिस्वास छ.ग. मार्केटिंग हेड
-बढ़ती गर्मी के मद्देनजर राज्य स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी,बीमारियों से सावधानी बरतकर बचा जा सकता है

राजनांदगांव, 31 मार्च 2022. गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है और दिनोंदिन तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पूरे प्रदेश में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो चला है। ऐसे में लू के साथ ही अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में मौसमी बीमारियों से बचाव को लेकर राज्य स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में एडवाइज़री जारी की है।

एडवाइज़री और ज़िले के विशेषज्ञों के अनुसार लू से बचने के लिए ज़रूरी है कि घर से निकले से पूर्व भरपेट पानी पियें। साथ ही सूती वस्त्रों का उपयोग भी इस सीजन में तपन से बचने में फायदेमंद हैं। गर्मी का मौसम अपने साथ कई बीमारियां साथ लेकर आता है, जिससे हर आयु वर्ग के व्यक्ति को सावधान रहना चाहिए। इनमें हीट स्ट्रोक व फूड पॉइज़निंग सबसे मुख्य हैं। लापरवाही बरतने पर मरीज की जान को जोखिम भी है। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने भी अपनी एडवाइज़री में लोगों से अपील की है कि वे “गर्मी से बचाव के सभी उपाय अपनाएं। बीमारी होने पर लापरवाह न बनें और चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।“

मौसमी बीमारियों के मद्देनजर जारी की गई एडवाइज़री के संबंध में जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ.मिथिलेश चौधरी ने बताया, “गर्मी के मौसम में बढ़ती धूप की तपन (लू) से सावधानी और शरीर को मौसमी बीमारी से बचाना जरूरी है। गर्म हवा के थपेड़े यानि लू चलने को हीट स्ट्रोक कहते हैं। चिकित्सीय भाषा में इसे हाइपरथर्मिया कहते हैं। जिस तेजी से तापमान बढ़ रहा है, आगामी माह में लू चल सकती हैं। प्यास लगना, सिर में तेज़ दर्द, बुखार, उल्टी, श्वांस तेज़ चलना, चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, पेशाब कम आना, बेहोश हो जाना इसके लक्षण है। लू के सीधे थपेड़ों से बचें। घर से बाहर निकलने से पहले भरपेट पानी अवश्य पियें। धूप में जाते समय सूती कपड़े पहने और सिर व कान को सूती कपड़े से ढंक कर रखें। इनके अलावा अन्य उपाय व सावधानियां बरत कर गर्मी में होने वाली मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है।“

सावधान रहें मौसमी बीमारियों से: सीएमएचओ 

गर्मी के मौसम में लू के अलावा और कई बीमारियां जिनसे लोगों को खतरा है। सिर्फ सावधानी ही हमें इनसे बचा सकती है। बकौल सीएमएचओ डॉ. चौधरी, “मीजल्स-रूबेला भी गर्मी के मौसम में होने वाली बीमारी है। तेज़ बुखार, खांसी के साथ कफ आना, गले में दर्द, आंखों में जलन और शरीर पर सफेद दाने निकलना, रोग के लक्षण हैं। बचाव के लिए एमएमआर का टीका लगवाएं। बच्चों को यह टीका सरकारी अस्पताल में नि:शुल्क लगता है। गर्मी के मौसम में टाइफाइड बुखार भी लोगों को खूब सताता है। यह साल्मोनेला एन्टेरिका सेरोटाइप टाइफी बैक्टीरिया से होने वाला रोग है। तेज़ बुखार, भूख ना लगना, पेट में तेज़ दर्द होना व कमजजोरी महसूस होना इसके लक्षण हैं। लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज कराएं। चिकनपाक्स बीमारी वैरिकाला जोस्टर वायरस के कारण होती है। यह वायरल संक्रमण है, शरीर पर लाल चकत्ते-दाने निकल आते हैं। यह संक्रामक रोग है, एक से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचता है। बेहतर होगा कि इसके मरीज को अलग कमरे में रखें। इस रोग से बच्चों को बचाने के लिए सरकारी अस्पताल में टीका नि:शुल्क लगाया जाता है। इलाज में लापरवाही न करें।

इसी तरह पीलिया रोग भी इन दिनों अधिक होता है जो कि दूषित खानपान के कारण होने वाली बीमारी है। आखों, नाखूनों, त्वचा और पेशाब का रंग पीला होना इसके लक्षण हैं। बीमारी से बचाव के लिए लीवर को स्वस्थ रखें। आसानी से पचने वाला भोजन जैसे खिचड़ी, दलिया का सेवन करें।"

गर्मियों की बीमारियों से बचाव के लिए क्या करें, क्या न करें

1.गर्मियों के दिनों में हल्का भोजन करें।

2.पूरी बांह के कपड़े पहनें और नंगे पैर बाहर ना निकलें।

3.हल्के रंगों वाले सूती कपड़े पहनें, सिंथेटिक कपड़ों से परहेज करें।

4.गर्मी के दिनों में कभी भी खाली पेट घर से बाहर ना निकलें।

5.ज्यादा देर तक धूप में रहना हो तो छाते का इस्तेमाल करें।

5.अधिक मात्रा में पानी पिएं। बाहर जाते समय पानी की बोतल साथ लेकर जाएं।

6. घर पर ही आम का पना या सेब का सिरका, बेल का शरबत वफलों का जूस बनाकर पियें। इनकी तासीर ठंडी होती है।

7. पेशाब में जलन होने पर चंदनासव या शरीर में जलन होने पर उशीरासव का प्रयोग करें, इनके विषय में आयुर्वेद चिकित्सकों के परामर्श से ले सकते हैं।

8. लू लगने की स्थति या अन्य किसी भी प्रकार के लक्षणों में तत्काल चिकित्सा परामर्श लेना चाहिए।

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