सुपोषण के लिए आयोजित शिशु संरक्षण माह के अंतर्गत जिले के आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत गर्भवती महिलाओं व शिशुवती माताओं को पूरक आहार बनाने व खिलाने की समझाईश देने के साथ ही संक्रमण से बचाव हेतु साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कई जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग के निर्देशन में खैरागढ़ विकासखंड के अतरिया सेक्टर व आंगनवाड़ी केंद्र तेलीटोला में भी विभिन्न प्रेरक आयोजन किए गए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व मितानिन की सहायता से परिजन को शिशुओं अथवा बच्चों में सुपोषण के फायदे और सुपोषित करने के तरीके बताए गए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रेखा क्षीरसागर ने बताया कि पोषक तत्वों की कमी से भी बच्चा कुपोषण का शिकार हो सकता है और ऐसे में बच्चे को सिर्फ सामान्य खाना खिलाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे के आहार में पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में शामिल हों। कुपोषण के लक्षण दिखने पर सबसे पहले बच्चे को संतुलित व पोषक तत्वों से भरपूर आहार देना चाहिए। बच्चे को एक ही बार में सारा खाना न खिलाएं बल्कि खाने के बीच नियमित अंतराल रखें। मितानिन जयंती साहू ने बताया कि बच्चे को कुपोषण से दूर रखने के लिए उसे ज्यादा से ज्यादा पानी पिलाएं। प्रतिदिन उसे कम से कम 1.5 लीटर पानी जरूर पिलाएं। इसके साथ ही मां का दूध बच्चे के लिए सबसे महत्वपूर्ण पौष्टिक आहार होता है। मां द्वारा शिशु को कम से कम छह माह तक सिर्फ स्तनपान कराना चाहिए। वहीं माता को स्वयं भी मौसमी फलों, हरी सब्जियों और रेडी टू ईट पौष्टिक आहार का उपयोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए। इसी तरह बच्चा अगर सख्त चीजें खाने लगा है तो उसे नियमित रूप से फल और सब्जियों का सेवन कराएं। ये सभी चीजें पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं।
इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने बतायाः “कुपोषण को मिटाने के उद्देश्य से जिले में विभिन्न जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व मितानिन की सराहनीय भूमिका है। सुपोषण अभियान का ही परिणाम रहा कि मानपुर, मोहला, छुईखदान के अंतर्गत आने वाले लक्षित कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार आया और वे अब सामान्य व मध्यम श्रेणी में आ गए हैं। अभियान के पश्चात कुल 680 बच्चों के वजन में वृद्धि दर्ज की गई है।”
शिशु का जतन करने में मिली मददः राजेश्वरी
लाभार्थी राजेश्वरी साहू ने बतायाः “कुपोषण को दूर करने के लिए सघन सुपोषण अभियान काफी प्रभावी सिद्ध हो रहा है। पोषण पखवाड़ा में जानकारी मिलने के बाद शिशु का जतन करने में काफी सहायता मिल रही है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व मितनिन की मदद से अब वह पूरी जानकारी मिलने लगी है जो शिशु के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं।”
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