योगी 2.0 सरकार का शपथ शुरू हो गया है। योगी ने दूसरी बार सीएम पद की शपथ ले ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अटल स्टेडियम में मौजूद हैं। 52 विधायक भी मंत्री एक-एक कर शपथ ले रहे हैं। इनमें 18 कैबिनेट मंत्री हैं। योगी 2.0 कैबिनेट में केशव मौर्य और बृजेश पाठक डिप्टी सीएम होंगे। बड़ी बात, दिनेश शर्मा, श्रीकांत शर्मा, सतीश महाना, मोहसिन रजा समेत करीब 20 मंत्रियों के नाम लिस्ट में नहीं है।
शपथ लेने वालों की पूरी लिस्ट
- योगी आदित्य- सीएम पद
- केशव मौर्य- डिप्टी सीएम
- बृजेश पाठक- डिप्टी सीएम
- सुरेश कुमार खन्ना- कैबिनेट मंत्री- 9वीं बार विधायक बने हैं, पिछली कैबिनेट में वित्त मंत्री थे।
- सूर्य प्रताप शाही- पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, पिछली सरकार में कृषि मंत्री थे।
- स्वतंत्र देव सिंह- प्रदेश अध्यक्ष, पिछली सरकार में भी मंत्री थे।
- बेबी रानी मौर्य- उत्तराखंड में राज्यपाल रह चुकी हैं।
- लक्ष्मी नारायण चौधरी- मथुरा से विधायक, जाट नेता, पहले बसपा में थे।
- जयवीर सिंह- मैनपुरी से जीतकर आए हैं। मैनपुरी सपा का गढ़ है।
- धर्मपाल सिंह- रुहेलखंड की बहेड़ी सीट से विधायक हैं। पिछली सरकार में सिंचाई मंत्री थे।
- नंद गोपाल नंदी- प्रयागराज से विधायक हैं। पिछली सरकार में भी मंत्री थे। सबसे अमीर मंत्रियों में भी इनका नाम शुमार है।
- भूपेद्र चौधरी- बिजनौर से आते हैं, ये MLC हैं। पिछली सरकार में पंचायती राज मंत्री थे।
- अनिल राजभर- शिवपुर से विधायक हैं। पिछली सरकार में भी मंत्री थे। पहले सपा सरकार में थे।
- जितिन प्रसाद- ब्राह्मण चेहरा, MLC हैं। एक साल पहले कांग्रेस से भाजपा में आए थे।
शपथ ग्रहण कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत 12 भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। योग गुरु बाबा रामदेव, विभिन्न मठों और मंदिरों के महंत, उद्योगपतियों को भी आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा, विपक्ष की नेता सोनिया गांधी, प्रियंका-राहुल, मुलायम सिंह, अखिलेश यादव और मायावती को भी न्योता भेजा गया है। हालांकि, अखिलेश ने पहले ही शपथ ग्रहण में शामिल होने से इंकार कर दिया है।
विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने यूपी की 403 में से 273 सीट पर जीतकर प्रचंड जीत हासिल की है। इसके साथ ही भाजपा ने 37 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है। लगातार दूसरी बार किसी दल की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी है। इसके पहले 1980 के बाद 1985 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जोरदार वापसी की थी। इसके बाद 37 साल हो गए, लेकिन कोई पार्टी सरकार दोबारा नहीं बना सकी थी।