राजनांदगांव, 14 मार्च 2022.
जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र मोहला, मानपुर एवं छुईखदान के गंभीर कुपोषित बच्चों तथा एनीमिक गर्भवती महिलाओं को सुपोषित करने के लिए विशेष अभियान चलाया गया जिसमें ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच करते हुए विशेष देखभाल की गई। जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कुपोषण दूर करने के लिए व्यापक कार्य किए गए।
जिले में सघन सुपोषण अभियान के अंतर्गत बच्चों को दो बार गर्म भोजन व माताओं को गर्म भोजन और सूखा राशन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला खनिज कोष (डीएमएफ) से राशि स्वीकृत की गई।
इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने बतायाः “सुपोषण के लिए कार्ययोजना बनाकर लक्षित बच्चों व गर्भवती महिलाओं के लिए कार्य किया गया। इसके तहत बच्चों को कम से कम चार बार अतिरिक्त आहार की उपलब्धता, 15 दिन से 1 माह में अनिवार्य स्वास्थ्य जांच, पालक व समुदाय की सहभागिता और सतत मॉनिटरिंग का लक्ष्य रखा गया। इन तथ्यों को ध्यान में रखकर छह माह के लिए मोहला, मानपुर व छुईखदान के गंभीर कुपोषित बच्चों व एनीमिक गर्भवती महिलाओं को लक्षित कर सघन कार्यक्रम की शुरूआत की गई।आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों को दो बार नाश्ता व दो बार गर्म भोजन घर पहुंचा कर दिया गया, जिसकी निगरानी उच्च अधिकारियों द्वारा की गई। साथ ही पोर्टल बनाकर प्रगति की एन्ट्री की गई। प्रत्येक बच्चे की जांच स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर कराई गई। स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए एम्स की भी मदद ली गई। इसके लिए पर्यवेक्षकों द्वारा सतत समन्वय स्थापित कर स्वास्थ्य टीम से जांच कराई गई। साथ ही दवाई, टॉनिक, कृमिनाशक दवा, विटामिन ए, जिंक सिरप आदि बच्चों को उपलब्ध कराया गया। बच्चों के साथ एनीमिक गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त पौष्टिक आहार की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। गर्भवती महिलाओं को 1 बार नाश्ता व 1 बार गर्म भोजन के लिए सूखा राशन घर पर उपलब्ध कराया गया। सुपोषण अभियान का ही परिणाम रहा कि मानपुर, मोहला, छुईखदान अंतर्गत लक्षित कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार आया और वे सामान्य व मध्यम श्रेणी में आए। अभियान के पश्चात कुल 680 बच्चों के वजन में वृद्धि दर्ज की गई है।“
कोरोनाकाल के दौरान भी हुए बेहतर प्रयास
कोरोना संक्रमणकाल में भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा पालकों, परिवार के सदस्यों, ग्रामीणजनों और समुदाय को कुपोषण के प्रति जागरूक किया गया। स्थानीय रूप से उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थो, व्यंजनों आदि के विषय में जागरूकता के लिए सतत कार्य किया गया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए हितग्राहियों के घरों व आंगनवाड़ियों में पोषण वाटिका लगाई गई, जिससे हरी सब्जियां, साग व पौष्टिक फल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकें। पंचायतों द्वारा बच्चों को दूध, फल, गुड़, चना, मूंगफली आदि उपलब्ध कराए गए। जागरूकता के लिए विभिन्न आयोजन किए गए तथा कई व्यक्तियों को कार्यक्रम से जोड़ा गया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भोजन और नाश्ता बनाकर बच्चों को खिलाया। उनके द्वारा रेडी टू ईट फूड के विभिन्न स्वादिष्ट व्यंजन बनाकर खिलाए गए। साथ ही माताओं को बनाने की विधि भी बताई गई। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा सादे भोजन को पौष्टिक बनाने की जानकारी दी गई।
और सुधर गई आदत
खड़गांव निवासी लाभार्थी गौरी निषाद ने बतायाः “कुपोषण को दूर करने के लिए सघन सुपोषण अभियान वास्तव में प्रभावी है। इससे बच्चों में खाने की आदत आई है और वे समय से भोजन ग्रहण करने लगे हैं। भोजन को पौष्टिक व बच्चे की रुचि के अनुसार बनाया जाता है जिसमें हरी सब्जी, दाल, अंडा तथा अन्य मांसाहार भी शामिल किए जाते हैं ताकि बच्चे तंदुरुस्त रहें।