बालोद में दिव्यांग युवती को मिला सहारा, अब लाठी नहीं, ट्राइसाइकिल से सफर होगा तय

त्वरित ख़बरें - 'मैडम' के क्षेत्र में समाज का कल्याण नहीं

बालोद में दिव्यांग युवती को मिला सहारा, अब लाठी नहीं, ट्राइसाइकिल से सफर होगा तय

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में त्वरित ख़बरें की खबर का असर हुआ है। जिले के पेटेचुवा गांव की रहने वाली दिव्यांग असवंतिन नरेटी रोज अपने काम पर जाने के लिए 10 किमी का सफर एक लाठी के सहारे तय करती थी। उसकी तकलीफ को सामने लाने के बाद अब बैटरी चलित ट्राइसाइकिल मिल गई है। इसकी खुशी दिव्यांग के चेहरे पर साफ देखी जा सकती है।

असवंतिन नरेटी के काफी दिनों से मदद की गुहार लगा रही थी। इसके लिए उसने अफसरों से लेकर मंत्रियों तक के चक्कर लगाए। क्षेत्र की विधायक और समाज कल्याण मंत्री अनिला भेड़िया के प्रतिनिधि पीयूष सोनी व समाजसेवी सुमित जैन की पहल से दिव्यांग युवती को बैटरी चलित ट्राइसाइकिल मिल गई है। मंत्री प्रतिनिधि ने उसे जल्द ही बेहतर रोजगार दिलाने का भी भरोसा दिया है।

दरअसल, असवंतिन नरेटी की दिव्यांगता 45% होने के कारण उन्हें हस्तचलित ट्राइसाइकिल दिया जाना था, लेकिन उन्होंने लेने से इनकार कर दिया था। युवती ने कहा था कि रोजाना 10 किमी का सफर हस्तचलित ट्राइसाइकिल से तय करना मुश्किल है, लिहाजा हमें बैटरी से चलने वाली ट्राइसाइकिल दी जाए। इसके बाद समाज कल्याण मंत्री और समाजसेवी साथ में आकर उसे बैटरी वाली ट्राइसाइकिल दी गई।

असवंतिन नरेटी के चेहरे पर खुशी
ट्राइसाइकिल मिलने के बाद असवंतिन नरेटी की खुशी उसके चेहरे पर साफ देखी जा सकती है।  कहा कि जिस मांग को हम सालों से सरकार से मांग कर रहे थे। वो चंद दिनों के अंदर ही पूरी हो गई। अब हमें लाठी के सहारे पैदल सफर तय नहीं करना पड़ेगा। हम अपनी ट्राइसाइकिल से आना-जाना करेंगे।

माता-पिता की हो चुकी मौत, काम कर 360 रुपए महीना कमाती है
डौंडी ब्लॉक के वनांचल गांव पेटेचुवा की रहने वाली असवंतिन नरेटी बचपन से दोनों पैरों से दिव्यांग है। माता-पिता की 10 साल पहले मौत हो चुकी है। उसके चार भाई हैं, लेकिन वे अपने परिवार में मस्त हैं। बावजूद इसके असवंतिन नरेटी ने जिंदगी से हार नहीं मानी और अपने दिव्यांग पैरों के लिए लाठी का सहारा ढूंढ कर उठ खड़ी हुई। वह सरकारी बिहान योजना में काम करती है। जहां उसे 360 रुपए महीना मिलता है।

समाज कल्याण मंत्री का है क्षेत्र
असवंतिन नरेटी के इस क्षेत्र से महिला एवं समाज कल्याण मंत्री अनिला भेड़िया विधायक हैं। बावजूद इसके कोई सुध नहीं ले रहा था। असवंतिन ने पहले बताया था कि एक बार उनके गांव में मंत्री मैडम आई थीं, तो उसने बड़े ही विनम्रता से ट्राइसाइकिल की मांग की थी। मौके पर तो आश्वासन मिला गया। लेकिन बाद में किसी प्रकार से कोई मदद नहीं की। पंचायत स्तर पर भी आवेदन किए थे।