राजनांदगांव, 04 मार्च 2022. शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य के लिए पोषक आहार देने के साथ ही निर्धारित आयु के बच्चों को निश्चित अंतराल में विटामिन-ए सिरप और आयरन फॉलिक एसिड (आईएफए) सिरप भी दिया जाना आवश्यक है। ऐसी ही आवश्यक जानकारियां देकर परिजन को जागरुक करने के लिए जिले में शिशु संरक्षण माह की शुरुआत की गई है, जो 8 अप्रैल तक चलाया जाएगा। इस दौरान शिशुओं की सेहत को प्राथमिकता में रखकर सुपोषण के लिए एक महीने तक विविध आयोजन किए जाएंगे। गांव-गांव में पोषण मेला लगाया जाएगा। बच्चों का वजन लिया जाएगा।
शिशु संरक्षण माह की शुरुआत में पहले दिन विभिन्न अस्पतालों में शिविर लगाकर शिशुओं की स्वास्थ्य जांच की गई तथा परिजनों को शिशु के सुपोषण संबंधी परामर्श दिया गया। शिशु संरक्षण माह के अंतर्गत जागरुकता अभियान भी शुरू किया गया है। इस दौरान सभी विकासखंडों के सीएचसी व पीएचसी में प्रतिदिन सुबह 9 से शाम 4 बजे तक सुपोषण से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शिशु संरक्षण माह की शुरुआत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी ने की। इस अवसर पर उन्होंने कहाः ”लगभग 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों के लिए विटामिन ए के अनुपूरक कार्यक्रम के माध्यम से विटामिन की कमी को पूरा करने के लिए शिशु संरक्षण माह की शुरुआत की जा रही है। यह कार्यक्रम वर्ष में दो बार चलाया जाता है। इस बार भी स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर दस सत्रों में नियमित रूप से विटामिन-ए के अनुपूरक कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को विटामिन-ए और आयरन फोलिक एसिड (आईएफए) दिया जाएगा। यह खुराक पिलाने के लिए जिले के समस्त शासकीय स्वास्थ्य केंद्र और आंगनवाड़ी केंद्रों पर व्यवस्था की गई है। साथ ही समस्त आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य केंद्रों पर बच्चों के वजन तौलने की व्यवस्था भी की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों का आयु के अनुसार शारीरिक विकास देखना है। यदि बच्चा सामान्य वजन से कम हुआ तो उसे निकटतम पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) भेजा जाएगा जहां उसकी संपूर्ण देखभाल की जाएगी और सामान्य वजन में लाने का प्रयास किया जाएगा।“
वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने कहाः “बच्चों को विटामिन-ए सिरप और आईएफए सिरप माता-पिता की देखरेख में मितानिन द्वारा दिया जाएगा। एक माह तक संबंधित क्षेत्र की मितानिन की निगरानी में यह सिरप पिलाया जाएगा। इस दौरान 9 माह से 1 वर्ष के बच्चों को विटामिन -ए सिरप 1 एमएल, 1 वर्ष से 5 वर्ष के बच्चों को विटामिन-ए सिरप 2 एमएल तथा 6 माह से 59 माह के बच्चों को सप्ताह में एक बार आईएफए सिरप 1 एमएल पिलाया जाएगा।“
इसलिए जरूरी है विटामिन ए और आईएफए सिरप
विटामिन ए से भरपूर भोजन का नियमित सेवन शरीर के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। यह हमारी त्वचा, आंखों और दांतों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। विटामिन-ए हड्डियों के विकास में सहायक होता है। इससे रोग प्रतिरोधक प्रणाली मजबूत होती है। इसके अलावा यह शिशु को संक्रमण से लड़ने, नेत्रों की रोशनी को स्वस्थ रखने और मजबूत दांत पाने में मदद करता है। वहीं आईएफए शरीर में हिमोग्लोबिन का स्तर सही रखता है। हिमोग्लोबिन के लिए शरीर में आयरन, फॉलिक एसिड, विटामिन सी, प्रोटीन और विटामिन बी 12 की मात्रा ठीक होनी चाहिए। यह शरीर के जरूरी तत्व हैं और इनमें से किसी को भी शरीर खुद नहीं बना सकता। अगर भोजन में इनमें से किसी भी तत्व की कमी हो तो शरीर में हिमोग्लोबिन कम हो जाता है और शरीर में पीलापन आ जाता है। ऐसी कमी को दूर करने के लिए बच्चों को आईएफए दिया जाता है।