आदिवासी वोटबैंक के पीछे-पीछे बहने लगी छत्तीसगढ़ की !!

त्वरित ख़बरें:-छत्तीसगढ़ में आदिवासी वोटबैंक को अपने पाले में करने के लिए भाजपा अब बस्तर में चिंतन शिविर करेगी। इस शिविर में राष्ट्रीय स्तर के 60 प्रमुख नेता शामिल होंगे। इस......................

छत्तीसगढ़ में आदिवासी वोटबैंक को अपने पाले में करने के लिए भाजपा अब बस्तर में चिंतन शिविर करेगी। इस शिविर में राष्ट्रीय स्तर के 60 प्रमुख नेता शामिल होंगे। इस दौरान संघ और उसके अनुशांगिक संगठन के पदाधिकारियों की अलग से बैठक होगी। प्रदेश की 90 में से 29 विधानसभा सीट आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है। आदिवासी वोटबैंक को अपने पाले में करने के लिए कांग्रेस और भाजपा जुगत भिड़ा रही है। भाजपा और कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष की कमान आदिवासी वर्ग को दी है।

    • बस्तर और सरगुजा की सभी आदिवासी सीट पर हार गए भाजपा उम्मीदवार
    • रमन सरकार में तीन आदिवासी थे मंत्री

दरअसल, सत्ता की चाबी आदिवासी विधायकों के हाथ में मानी जा रही है। प्रदेश में भाजपा की तीनों सरकार में बस्तर की 12 विधानसभा सीट ने महत्वूपर्ण भूमिका निभाई थी। यही कारण है कि भाजपा सरकार में बस्तर के दो विधायकों को मंत्री पद से नवाजा गया था। पिछले विधानसभा चुनाव में बस्तर और सरगुजा में पहली बार भाजपा पूरी तरह से साफ हो गई। बस्तर की 12 में से 11 विधानसभा सीट आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है। इसमें से सिर्फ एक सीट दंतेवाड़ा में भाजपा को जीत मिली थी।

नक्सली हमले में दंतेवाड़ा विधायक भीमा मंडावी की मौत के बाद हुए उपचुनाव में यह सीट भी भाजपा के हाथ से चली गई। यही नहीं, पूरे प्रदेश में जब मोदी लहर पर सवार होकर लोकसभा में भाजपा उम्मीदवारों की जीत हुई, उस दौर में बस्तर के लोगों ने कांग्रेस का साथ दिया और 15 साल बाद कांग्रेस का सांसद चुना गया।

कांग्रेस भी मास्टर स्ट्रोक मारने की तैयारी में

वहीं, कांग्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इंद्रावती विकास प्राधिकरण के पदाधिकारियों की घोषणा करके मास्टर स्ट्रोक मारने की फिराक में है। इसकी घोषणा के साथ बस्तर के एक विधायक को कैबिनेट मंत्री और दो विधायक को राज्यमंत्री का दर्जा देने का रास्ता खुल जाएगा। वर्तमान में कांग्रेस के सिर्फ तीन विधायक ही निगम-मंडल में एडजेस्ट नहीं हो पाए हैं। इसमें प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम, देवती कर्मा और राजमन बेंजाम हैं। चर्चा है कि प्राधिकरण का रास्ता साफ होने के साथ ही देवती को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जा सकता है।

यह सीट है आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित

प्रदेश की 90 विधानसभा सीट में से 29 सीट आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है। इसमें बस्तर की दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़, केशकाल, बस्तर, चित्रकोट सीट है। इसके साथ ही भरतपुर सोनहत, प्रतापपुर, रामानुजगंज, सामरी, लुंड्रा, सीतापुर, जशपुर, कुनकुरी, पत्थलगांव, लैलूंगा, धरमजयगढ़, रामपुर, पाली-तानाखार, मरवाही, बिंद्रानवागढ़, सिहावा, डौंडीलोहारा, मोहला मानपुर है।

सरकार की गलत नीतियों से आदिवासी वर्ग में आक्रोश: विष्णुदेव

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा कि कांग्रेस सरकार की गलत नीतियों के कारण आदिवासी वर्ग में आक्रोश है। आदिवासी समाज के खिलाफ सरकार की नीतियों, सरकारी संरक्षण में चल रहे मतांतरण, आदिवासियों की जमीन को अवैध तरीके से हथियाने और आदिवासियों के खिलाफ हिंसा को रोकने में सरकार पूरी तरह विफल रही है। वन अधिकार कानून और पेसा कानून को ठीक ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है। वन अधिकार पट्टा बांटने में भी गड़बड़ी सामने आ रही है।

आदिवासी को उप मुख्यमंत्री बनाते तो सार्थक होता आदिवासी दिवस: जकांछ

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मीडिया प्रमुख इकबाल अहमद रिजवी ने कहा कि कांग्रेस सरकार किसी आदिवासी को उपमुख्यमंत्री बनाती तो आदिवासी दिवस की सार्थकता होती। आदिवासी वर्ग के साथ 15 साल में भाजपा ने कभी न्याय नहीं किया। वहीं, ढाई साल में कांग्रेस ने इस वर्ग को कोई तवज्जो नहीं दी। कांग्रेस-भाजपा अगला मुख्यमंत्री किसी आदिवासी को बनाने की घोषणा करे, तब सही मायनों में आदिवासी दिवस की सार्थकता सिद्ध होगी।