गंडई। विधायक देवव्रत सिंह के आकस्मिक निधन के बाद खैरागढ़ विधानसभा में उपचुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई है। सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी हो या फिर विपक्षी पार्टी भाजपा या फिर सभी पार्टियां चुनावी तैयारियों में जुट गई है और चुनाव लड़ने के इच्छुक नेता टिकट पाने की जुगत में भीड़ गए हैं। हालांकि अभी उप चुनाव की घोषणा नहीं हुई है फिर भी टिकट की लालसा रखने वाले बायोडाटा के साथ अपने आकांछाओं की चौखट पर पहुंचना शुरू हो गए हैं। कांग्रेस में 30 दावेदार बताए जा रहे हैं वहीं भाजपा में तीन दावेदार हैं।
कांग्रेस में कई दावेदार : सत्तारूढ़ कांग्रेस से भी कई दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं। सभी अपनी टिकट पक्की बता रहे हैं। यही नहीं अपनी टिकट पक्की होने के पीछे की ठोस वजह भी गिना रहे हैं। मगर यह चुनाव है जब तक दी फार्म हाथ में ना आ जाए तब तक टिकट पक्की होने की गलतफहमी पाल ना खुद को धोखा देने के बराबर है।
रंजीत सिंह ने की दावेदारी: कांग्रेस किसान के प्रदेश महामंत्री रंजीत सिंह चंदेल ने भी अपनी दावेदारी पेश की है। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस के कर्मठ सिपाही हैं। पार्टी ने अब तक उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है उसे उन्होंने बखूबी निभाया है। उन्होंने कहा है कि यदि खैरागढ़ में उन्हें विधानसभा का टिकट मिलता है तो वे निश्चित ही जीत दर्ज करेंगे और पार्टी को निराश नहीं होने देंगे।
संगठन की जिम्मेदारी का लंबा अनुभव: टिकट को लेकर अपनी दावेदारी पुख्ता करते हुए 44 वर्षीय चंदेल ने कहा कि वह 15 साल की उम्र से पार्टी से जुड़े हैं। तकरीबन 29 से 30 साल के अपने राजनीतिक कैरियर में उन्होंने संगठन और सप्ताह दोनों में काम किया। इस दौरान पार्टी ने जो भी जिम्मेदारी दी उस पर खरा उतरा हूं।
जवाबदारी भी निभाई: चंदेल ने बताया कि खैरागढ़ के विक्टोरिया हाई स्कूल में नौवीं कक्षा में कि साला इकाई का निर्विरोध कोषाध्यक्ष चुने जाने पर उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई है पूर्णविराम उनकी मेहनत को देखते हुए अगले ही साल उन्हें छुई खदान ब्लॉक युवा कांग्रेसका महामंत्री बना दिया गया और 4 साल बाद ग्रामीण ब्लॉक अध्यक्ष। चंदेल ने कहा कि अपने काम के प्रति निष्ठा और ईमानदारी के कारण पार्टी ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने का मौका दिया है। इसके बाद 1999 में वह राजनांदगांव जिला ग्रामीण युवा कांग्रेस के संयुक्त सचिव कोमा अगले साल 2000 में सचिव और 2002 में जिला ग्रामीण युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष बनाए गए। इसके बाद 2011 में लोकसभा लोकसभा युवा कांग्रेस महासचिव की जिम्मेदारी दी गई और 2013 में लोकसभा युवा कांग्रेस के महासचिव का दायित्व उन्हें सौंपा गया।
चुनाव में लगातार जीत दर्ज किया: चंदेल ने अपनी दावेदारी पुख्ता करते हुए बताया कि अब तक उन्होंने जितने भी चुनाव लड़े सभी में उन्हें जनता का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है और जीत दर्ज की है। सबसे पहले 2009 में जनता ने उन्हें पथरा पंचायत में निर्विरोध पंच चुनकर जीत का आशीर्वाद दिया। अगली बार 2009 में वे उपसरपंच चुने गए। 2015 में सरपंच बने और वर्तमान में 2020 से उपसरपंच के अलावा सेवा सहकारी समिति घुमा के संचालक मंडल सदस्य की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
सामाजिक दायित्व को निभाया;: सामाजिक गतिविधियों में उन्होंने हमेशा बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया उन्होंने बताया कि राजपूत छत्रिय महासभा उप समिति गंडई के नवयुवक मंडल के 2001 में वे पहली बार निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए। इस जिम्मेदारी को उन्होंने लगातार 11 साल तक निभाया वह 2012 तक इस पद पर बने रहे। इसके बाद समाज ने 2012 में छत्तीसगढ़ राजपूत छत्रिय केंद्रीय नवयुवक मंडल के कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। उसे भी उन्होंने पूरी शिद्दत से निभाया।
तीन पीढ़ियों का कांग्रेसी रिश्ता: चंदेल ने अपनी दावेदारी पुख्ता करते हुए आखिरी दांव भी खेल दिया है। जो उनके लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है और कांग्रेस में उसकी बहुत अहमियत मानी जाती है।