जल जीवन मिशन ने बदली ग्राम पंडरी की तस्वीर, घर-घर नल से महिलाओं को मिली पानी ढोने की मजबूरी से राहत...

त्वरित ख़बरें :- अमित यादव रिपोर्टिंग

रायपुर। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड के आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंडरी में कभी पानी के लिए सुबह होते ही जद्दोजहद शुरू हो जाती थी। सिर पर बर्तन रखकर दूर स्थित जलस्रोत तक जाना, घंटों इंतजार करना और फिर पानी लेकर लौटना यहां की महिलाओं की रोज की कहानी थी।

आज उसी पंडरी की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन पहुंचने से अब आंगन में लगे नल से ही स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल मिल रहा है।

महिलाओं को मिली बड़ी राहत

गांव की श्रीमती शीला केवट बताती हैं, "पहले पानी भरने के लिए घर के जरूरी काम छोड़कर दूर जाना पड़ता था। कई बार सुबह का पूरा समय पानी लाने में ही निकल जाता था। अब घर में ही नल से पानी मिलने से बहुत सुविधा हो गई है। समय बचता है, जिसे बच्चों और परिवार के कामों में लगा पाती हूं।"

उनके जैसी ही गांव की कई महिलाओं के लिए नल से आने वाली हर धार सुविधा के साथ बेहतर भविष्य की उम्मीद भी लेकर आई है।

PM मोदी का हर घर जल का विजन

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को जल जीवन मिशन की घोषणा की थी। उस समय देश के 18.93 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से महज 3.23 करोड़ यानी करीब 17 प्रतिशत परिवारों के पास ही नल से जल की सुविधा थी।

मिशन का उद्देश्य सिर्फ पाइप बिछाना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों को नियमित और सुरक्षित पेयजल के साथ जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और ग्रे-वॉटर प्रबंधन को बढ़ावा देना भी है।

जीवन की गुणवत्ता में आया बदलाव

घर तक नल पहुंचने से महिलाओं को पानी ढोने की कठिन मेहनत से छुटकारा मिला है। बच्चों को पढ़ाई और खेल के लिए ज्यादा समय मिल रहा है। स्वच्छ पेयजल से स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।

केंद्र सरकार ने 2026 में जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक जारी रखने और जल जीवन मिशन 2.0 के तहत जलापूर्ति की गुणवत्ता और स्थिरता पर और जोर देने का निर्णय लिया है।

सच में, पंडरी में अब नल से गिरती पानी की बूंदें सिर्फ प्यास नहीं बुझा रही, बल्कि विकास और सम्मान की नई कहानी लिख रही हैं।