भरोसे का कत्ल: CA ऑफिस में चोरी करने वाला निकला पुराना कर्मचारी, साथी के साथ मिलकर उड़ाए लाखों रुपये...

त्वरित खबरें :- अमित यादव रिपोर्टिंग

रायपुर। राजधानी रायपुर में हुए लाखों रुपये की चोरी के मामले में पुलिस ने ऐसा खुलासा किया है जिसने सभी को चौंका दिया। जिस कर्मचारी ने लंबे समय तक ऑफिस में काम किया और हर कोने की जानकारी रखता था, उसी ने अपने साथी के साथ मिलकर चोरी की पूरी साजिश रची। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 7 लाख 80 हजार रुपये नकद बरामद कर लिए हैं।

कैसे हुआ चोरी का खुलासा?

यह मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित सी.ए. तारवानी एंड एसोसिएट्स ऑफिस का है। ऑफिस में कैशियर के पद पर कार्यरत अपर्णा नायक ने पुलिस को शिकायत दी कि 20 जुलाई की रात अज्ञात चोर ऑफिस में घुसा और कटर से कैश काउंटर का लॉक काटकर लाखों रुपये लेकर फरार हो गया। अगले दिन सुबह जब ऑफिस का चालक पहुंचा तो घटना का पता चला।

सूचना मिलते ही पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 331(4) और 305 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

पुराना कर्मचारी ही निकला मास्टरमाइंड

जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और मुखबिरों की मदद से मामले का खुलासा किया। जांच में सामने आया कि चोरी की पूरी साजिश ऑफिस के एक पूर्व कर्मचारी ने रची थी। उसे ऑफिस की सुरक्षा व्यवस्था, कैश रखने की जगह और आने-जाने के रास्तों की पूरी जानकारी थी। इसी जानकारी का फायदा उठाकर उसने अपने एक साथी के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया।

7.80 लाख रुपये बरामद, दोनों आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उन्होंने चोरी की वारदात कबूल कर ली। उनकी निशानदेही पर 7 लाख 80 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि चोरी की योजना कब बनाई गई और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी।

इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कई बार सबसे बड़ा खतरा बाहर से नहीं, बल्कि अंदर के भरोसेमंद लोगों से होता है। पुलिस आगे की पूछताछ कर मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।

टीम ने खंगाले CCTV, फिर ऐसे खुला चोरी का पूरा राज

घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा सिविल लाइन थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने जांच शुरू की। टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, ऑफिस के कर्मचारियों से पूछताछ की और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर जांच आगे बढ़ी।

जांच के दौरान पुलिस को अहम सुराग मिला और संदेह ऑफिस के एक पूर्व कर्मचारी पर गया। इसके बाद पुलिस ने बिलासपुर से पूर्व कर्मचारी उमेश पोर्ते को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि उसे ऑफिस में रखी नगदी और सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी थी। इसी जानकारी का फायदा उठाते हुए उसने अपने साथी लक्ष्मीनारायण ध्रुव के साथ मिलकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया।

आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने चोरी के 7 लाख 80 हजार रुपये नकद बरामद कर लिए। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।