छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 155 महिलाओं ने 15 स्थानों पर शुरू किया गया मुर्गीपालन और अंडा उत्पान डबल फायदे का सौदा हो गया है। अंडे की आपूर्ति पूरी करने के लिए शुरू किए गए इस व्यवसाय से महज 6 माह में महिलाओं ने 11.70 लाख रुपए से ज्यादा की कमाई कर ली। वहीं महिला बाल विकास विभाग की ओर से संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को भी दिए गए हैं। इसके चलते जिले में कुपोषण की दर भी 15 फीसदी कम हो गई है।
दरअसल, जिले के बच्चों में कुपोषण की समस्या बड़े पैमाने पर बनी हुई थी। अंडे में पोषक तत्वों को देखते हुए जिला प्रशासन ने इसे आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को मिलने वाले भोजन में शामिल किया। इसके चलते कुपोषण को कम करने का प्रयास था, लेकिन दूसरी चुनौती इतनी बड़ी मात्रा में अंडों की सप्लाई को लेकर सामने आ गई। यह देखकर स्थानीय महिलाओं के साथ जनवरी 2021 में मुर्गीपालन और अंडा उत्पादन की शुरुआत की गई।
हर दिन एक हजार अंडे उपलब्ध करा रहा स्व सहायता समूह
जिला प्रशासन के सहयोग से विकासखंड बीजापुर की 2, भैरमगढ़ की 6, उसूर की 4 और भोपालपटनम की 3 स्व सहायता समूह की कुल 155 महिलाओं ने अपने परंपरागत कार्य मुर्गी पालन शुरू किया। इसके लिए उन्हें पशुपालन विभाग की ओर से प्रशिक्षण भी दिया गया। महिलाओं ने अपनी मेहनत से महज 7 माह में जिले के 85 आंगनबाड़ी केंद्रों को प्रतिदिन एक हजार अंडे उपलब्ध कराना शुरू कर दिया। इसका असर भी बच्चों पर दिखने लगा है।
एक साल में कुपोषण घटकर 23.5 प्रतिशत पर पहुंचा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2018-19 में बीजापुर में कुपोषण की दर 38.5 प्रतिशत थी। जिसमें अभी 15 प्रतिशत की गिरावट आ गई है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, अब यह 23.5 फीसदी ही रह गई है। इन सबके पीछे महिलाओं की मेहनत को बताया जा रहा है। उन्होंने खुद की आमदनी का जरिया तलाश करने के साथ ही बच्चों में कुपोषण को दूर करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
बीजापुर जिला पंचायत CEO रवि साहू कहते हैं कि मुर्गी पालन का कार्य महिलाएं बहुत अच्छे से कर रही हैं। समूहों से 30 जून तक करीब 11.70 लाख रुपए के अंडे खरीदे गए हैं। वहीं रानी दुर्गावती स्व सहायता समूह की अध्यक्ष सोनमणि पोरतेक बताती हैं कि अब तक 28 हजार से अधिक अंडे का उत्पादन किया है। बिक्री से 74 हजार रुपए मिल चुके हैं और महिला बाल विकास विभाग से करीब 88 हजार रुपए की राशि मिलनी है।