छत्तीसगढ़, के अतिथि शिक्षकों का संविलियन की मांग को लेकर आंदोलन लगातार जारी है। आंदोलन के नौवें दिन प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के नाम अपने खून से पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग की। इस दौरान कई शिक्षक भावुक होकर रो पड़े और कहा कि यदि सरकार उन्हें संविलियन नहीं दे सकती, तो उन्हें इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दी जाए।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज तक उनके भविष्य को लेकर कोई स्थायी निर्णय नहीं लिया गया। उनका आरोप है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद संविलियन के मुद्दे पर कोई ठोस फैसला नहीं हो रहा है।
शिक्षकों ने बताया कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर शिक्षा मंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर सरकार तक अपनी पीड़ा पहुंचाने की कोशिश की है। उनका कहना है कि आर्थिक असुरक्षा और नौकरी की अनिश्चितता के कारण उनका परिवार गंभीर संकट से गुजर रहा है।
आंदोलन के नौवें दिन भी अतिथि शिक्षक बड़ी संख्या में धरना स्थल पर डटे रहे। उनकी उम्मीद थी कि कैबिनेट बैठक में संविलियन के मुद्दे पर कोई निर्णय लिया जाएगा, लेकिन बैठक के बाद भी इस संबंध में कोई घोषणा नहीं हुई। इससे आंदोलनकारी शिक्षकों में निराशा और नाराजगी बढ़ गई।
अतिथि शिक्षकों ने सरकार से जल्द संविलियन पर निर्णय लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।