राजनांदगांव के डॉ. चेतन साहू बन रहे लकवा मरीजों के लिए उम्मीद की किरण

त्वरित खबरे ;हर्ष कुमार गुप्ता

राजनांदगांव / संस्कार धानी नगरी केवल कला / साहित्य व खेल की नगरी नहीं है समाज सेवा के साथ- साथ अपनी चिकित्सीय पेशा से मरनासन्न लोगों को जीवन दान देने के पुनीत कार्य के लिए भी जाना जाने लगा है। वैसे बता दें कि संस्कार धानी के रहवासियों में सेवा भावना कूट-कूट कर भरी हुई है। यह भावना डाक्टरों में भी देखने मिले तो निश्चित ही इसे दैवीय गुण ही कहा जा सकता है। यही वजह है कि इन तरह के डाक्टरों को भगवान कह कर नवाजा जाता है। हमारे शहर में ऐसे ही एक डाक्टर है चेतन साहू।

भगवान ने न जाने उनके हाथ में एसी क्या करामात दी है कि उनके पास कैसे भी लकवा ग्रस्त,, फालिज का शिकार व्यक्ति आए ,,जल्द ही भला चंगा हो जाता है‌ यहां तक कि बेहोशी की हालत में  शिथिल अंगों से उनके पास  लाए गए लकवा ग्रस्त व्यक्ति कुछ ही समय मे चलने- फिरने लायक हो जाता है। इसे करामात ही माना जा रहा है।‌

उम्मीद और विश्वास की कहानी

 डाक्टर चेतन साहू के पास नरेंद्र वर्मा नामक व्यक्ति को बेहोशी की हालत में गांव तरफ से एक दिन तक झाड़- फूंक करवा कर लाया गया था।

0 उसका रक्तचाप नहीं आ रहा था और आक्सीजन भी नहीं मिल रहा था। 5 दिनों तक वेंटिलेटर में रखने व कारगर मेडीसीन देने सहित फिजियोथेरेपी करने के बाद वह भला चंगा हो गया।

0  मरीज के पूरी तरह ठीक होने के बाद उसकी बहन कांति वर्मा ने कहा कि हमने तो अपने भाई को खो दिया था लेकिन यहां उसे नव-जीवन दान मिला,,।

बता दें कि डॉ चेतन साहू पिछले दिनों तीन दिनों तक मेगा रोग निदान शिविर लगाकर उन्होंने अपने विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम सहित लगभग डेढ़ हजार मरीजों की चिकित्सा सेवा की वह भी उन मरीजों का खाना-पीना, चाय- नास्ते की सेवा के साथ। कुछ मरीजों का तो नवजीवन हास्पीटल के शिविर में आपरेशन भी किया गया। तीन दिन में 1500 मरीजों की फ्री में पूरे चेक अप और पूरी सेवा -सुश्रूआ के साथ रोग निदान किया जाना डाक्टर चेतन‌ का शहर में एक रिकार्ड बना हुआ है।

लकवा ग्रस्त लोगों को दे रहे जीवन दान

डाक्टर चेतन साहू इन दिनों लकवाग्रस्त मरीजो को कुछ समय में ही ठीक कर देने के लिए जाना जा रहा है। बड़ी संख्या में लकवाग्रस्त मरीज उनकी दक्षता पूर्ण सेवाएं ले कर भला-चंगा हो कर जा रहे हैं। दो-चार दिन पहले ही अंबागढ़ चौकी क्षेत्र से  महरूम खुर्द ठेलकाडीह निवासी 34 वर्षीय  नरेंद्र वर्मा को नीम बेहोशी की हालत मे लाया गया।  जिसका हाथ -पैर काम ही नहीं कर रहा था। शरीर सुन्न पड़ा हुआ है। उसे उसकी बहन कांति वर्मा उसे नवजीवन देने के लिए डाक्टर चेतन के पास लाई थी। डाक्टर चेतन ने उसे एक चुनौती के रूप स्वीकार करते हुए उसे 24 घंटे  वेंटिलेटर में रखा और  क्रिटिकल केयर की सेवा देते हुए ऐसी मेडीसीन दी कि उक्त लकवा ग्रस्त मरीज कुछ समय में ही बेहोशी की हालत से निकल कर  उठ बैठा और धीरे-धीरे उसके अंग काम करने लगे। 5 दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट में रखे जाने के बाद वह रिकवर  हो कर गया। बाद में लकवा ग्रस्त मरीज खुद चलकर डाक्टर के पास अपना चेकअप कराने आया। अपने भाई के पूरी तरह ठीक हो जाने से बहन डाक्टर चेतन का धन्यवाद करते नहीं अघा रही है। ऐसा ही एक लकवाग्रस्त बुजुर्ग का केस ग्राम गातापार से लाया गया। मानसिंग सिन्हा नामक 65 वर्षीय बुजुर्ग को महामाया चौक समीप स्थित एक मेडिकल स्टोर्स के संचालक ने लाया था।

फालिज के मरीजों के लिए स्पेशलिटी हासिल

पक्षाघात का शिकार उक्त बुजुर्ग का एक तरफ का अंग काम नहीं कर रहा था। मुंह भी लगभग टेढ़ा हो चुका था। उसे एडमिट कर डाक्टर चेतन ने ऐसी चिकित्सीय सेवा दी कि उक्त बुजुर्ग उठना बैठना शुरू कर दी। टेढ़ा मुंह भी लगभग ठीक हो गया। पूरी तरह ठीक होते ही दूसरे दिन उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। इस तरह देखा जाए तो फालिज के शिकार लकवाग्रस्त लोगों को चंद समय में ही पूरी तरह ठीक करने में डाक्टर चेतन एक तरह की महारथ हासिल कर ली है।

डाक्टर चेतन साहू का कहना है कि  पक्षाघात लकवा के शिकार को तुरंत या 4 - 5 घंटे के भीतर लाया जाता है तो थंबोलिसिस की सहायता से दिमाग में  खून के प्रवाह को फिर से चालू किया जा सकता है। और यदि 12 घंटे में आते हैं तो थम्बेकट्रामी की सहायता से मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह से पुनः स्थापित किया जा सकता है। अगर मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह 3 मिनट तक न हो तो हाइपोपोक्सिस क्षति होने का खतरा रहता है। इसलिए मरीज को अति शीघ्र डाक्टर को दिखाना जरूरी है।लकवा के मरीजो के लिए मेडीसीन व फिजियोथेरेपी का विषेश योगदान रहता है। इस तरह देखा जाए तो फालिज के शिकार लकवा ग्रस्त लोगों को कुछ ही समय‌ में पूरी तरह ठीक करने में डाक्टर चेतन साहू विशेषज्ञता हासिल कर ली है। इस पर और भी विशेष कोर्स करने के लिए वे अभी मुंबई भी गए थे। उक्ताशय की जानकारी उनके तीन दिवसीय निःशुल्क चिकित्सा शिविर में समय दान कर मरीजों की सेवा करने वाले सेवानिवृत्त प्राध्यापक परदेशी राम साहू ने दी।