Narendra Modi की बचत और संसाधनों के सीमित उपयोग की अपील का असर अब देश के कई राज्यों में दिखाई देने लगा है। केंद्र सरकार की ओर से सादगी और खर्चों में कटौती का संदेश दिए जाने के बाद 12 राज्यों ने अलग-अलग स्तर पर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकारी दफ्तरों से लेकर वीआईपी व्यवस्थाओं तक में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई राज्यों ने ईंधन, बिजली और प्रशासनिक खर्च कम करने के लिए नई व्यवस्थाएं लागू की हैं।
Tripura सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कई सरकारी कार्यालयों में केवल 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि इससे बिजली, ईंधन और अन्य प्रशासनिक खर्चों में कमी लाने की कोशिश की जा रही है। कर्मचारियों को रोटेशन के आधार पर कार्यालय बुलाने की योजना बनाई गई है, जबकि बाकी कर्मचारी जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन माध्यम से काम करेंगे। सरकार का मानना है कि इससे संसाधनों की बचत के साथ प्रशासनिक कामकाज भी प्रभावित नहीं होगा।
वहीं Andhra Pradesh और Goa में मुख्यमंत्री के काफिलों को छोटा करने का फैसला लिया गया है। दोनों राज्यों में सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए वाहनों की संख्या लगभग आधी कर दी गई है। इसके अलावा गैरजरूरी सरकारी वाहनों के उपयोग पर भी रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं। अधिकारियों को आवश्यक होने पर ही वाहन इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। सरकार का कहना है कि इससे ईंधन की बचत होगी और सरकारी खर्चों में कमी आएगी।
कई अन्य राज्यों में भी बिजली की खपत कम करने, सरकारी कार्यक्रमों में फिजूलखर्ची रोकने और अनावश्यक यात्राओं पर नियंत्रण जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। कुछ राज्यों ने सरकारी बैठकों को वर्चुअल माध्यम से आयोजित करने पर जोर दिया है ताकि यात्रा और अन्य खर्च कम किए जा सकें। प्रशासनिक स्तर पर भी सादगी अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी राज्य इस तरह के कदम लंबे समय तक लागू रखते हैं तो इससे सरकारी खर्चों में बड़ी बचत हो सकती है। साथ ही ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री की अपील के बाद राज्यों द्वारा उठाए गए इन कदमों को देशभर में सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।