महासमुंद - बेमौसम बारिश ने नदी में खेती करने वाले किसानों को चिंता में डाला

त्वरित ख़बरें - तीसरी बार क्यारियों तक पहुंचा महानदी का पानी, तेज धार में फिर बह गए बीज

बेमौसम बारिश ने नदी में खेती करने वाले किसानों को चिंता में डाल दिया है। दो बार नदी के तेज बहाव से फसल का बीज बह गया था। अब तीसरी बार किसानों ने इस उम्मीद से बीज रोपे कि शायद अब बारिश से नुकसान नहीं होगा, लेकिन तीसरी बार भी किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया।

बैराज से पानी छोड़ने के कारण 3-4 दिन पहले बनी तरबूज, खरबूज, ककड़ी सहित अन्य फसल की क्यारियां डूब गईं और पानी की तेज धार में सारे बीज बह गए। इस सीजन में तीसरी बार किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। इस बार ग्रीष्मकालीन सीजन में रसीले फलों का स्वाद देर से चखने को मिलेगा, क्योंकि बारिश के चलते फसल की बोआई नहीं हो पा रही है। वहीं बैराज वाले भी बारिश होने के कारण ऊपरी पानी गंदा न हो इसलिए गेट खोल देते हैं। इसकी वजह से इनकी फसल बह जा रही है। अब तक लग जाते थे फूल, खाद डालने का था समय : किसानों ने बताया कि नवंबर माह से खेती की शुरुआत हुई थी। दिसंबर माह में बोआई हो गई थी। जनवरी माह के अंत में फूल लगना शुरू हो जाता है। वहीं खाद डालने का समय भी आ गया था। फरवरी से फल आने लगते हैं, लेकिन इस बार फसल दो महीने पीछे चल रहा है।

किसानों ने बताई बार बार बर्बादी की कहानी

ककड़ी, तरबूज और खीरा बोते हैं
ग्राम घोड़ारी निवासी शत्रुघन निषाद, यादराम निषाद, ओकार निषाद ने बताया कि हर साल नदी में ककड़ी, तरबूज, खरबूज व खीरा की फसल लेते हैं।

नवंबर से बना रहे थे क्यारियां
इस बार भी नदी में पानी का स्तर कम होने के बाद पानी की धार को मोड़कर क्यारी का निर्माण किया था। नवंबर माह के अंत से काम शुरू किया गया था।

15-20 हजार लगा चुके थे
15-20 हजार रुपए खर्च कर क्यारी बनाई। इसके बाद फसल की बोआई भी की। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में बारिश होने की वजह से बीज खराब हो गया।