वरिष्ठ नागरिक संघ द्वारा संगोष्ठी संपन्न...

त्वरित ख़बरें - सत्यभामा दुर्गा रिपोर्टिंग

राजनांदगांव : संविधान दिवस के अवसर पर दिनांक 26 नवंबर को पुराना विश्रामगृह में वरिष्ठ नागरिक संघ द्वारा एक संगोष्ठी आयोजित की गई जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में राकेश इंदुभूषण ठाकुर  ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान की संरचना एक लंबे विचार विमर्श के पश्चात हुई। संविधान में समय के आवश्यकतानुसार संशोधन हुए जो हमारे उच्च आदर्शो को स्थापित करने में सफल हुए। संविधान के प्रति सम्मान व जागरूकता एवं राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति समर्पण को लेकर विचार गोष्ठी में अपनी बात कही। तत्पश्चात संगोष्ठी में भारत के राष्ट्रपति पद पर निर्वाचन हेतु प्रत्याशी के रूप में आर.एल. कांडे (अधिवक्ता) विश्व बौद्ध संघ के संरक्षक ने कहा कि राष्ट्रधर्म को जातिवाद के आधार पर प्रभावित नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि अपने सार्वजनिक जीवन में सामान्य वर्ग से आवेदन करते रहे। बौद्ध धर्म में किसी भी प्रकार की जात पात की कोई व्यवस्था नहीं है उसी प्रकार भारतीय संविधान के तहत राष्ट्रवादी विचारों की स्थापना के लिए हमें जात पात से हटकर राष्ट्रीय एकता के साथ कार्य करना चाहिए। संबोधन की कडी में वरिष्ठ नागरिक संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ.डी.सी. जैन ने कहा कि भारत गुलामी से मुक्त होकर अपना स्वयं का संविधान, नागरिकों की सुरक्षा, सुविधा एवं सर्वांगीण विकास व राष्ट्र निर्माण हेतु तैयार किया गया। जो कई क्षेत्रों मे विफल भी हुआ जिसके कारण अनेकों संशोधन हुए हैं जो राष्ट्र निर्माण व कल्याणकारी कार्यो में बाधक सिद्ध हो रहा है इसीलिए अब देश को नए संविधान की आवश्यकता है। पत्रकार कल्याण महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश संगठन सचिव व वरिष्ठ पत्रकार क्रांतिकारी विचारों के धनी दिनेश नामदेव ने कहा कि यद्यपि हमारा संविधान बहुत बड़ा और विस्तृत है जिसका पालन करने में स्वयं सरकार विफल रही है। अत्यधिक लचीला व नरम होने से विभिन्न अपराधों की जननी बनी हुई है उक्त संविधान मेें आर्थिक समानता का कोईउल्लेख नहीं है जिसके कारण समाज में बढ़ता असंतोष व अराजकता एक प्रमुख कारण है। इस संबंध में दिनेश नामदेव ने कई उदाहरण भी प्रस्तुत किए। जिला उपभोग्ता आयोग के सदस्य आनंद वर्गीस ने संविधान को न्याय की मंशा के अनुरूप बताया और समाज हितैषी कारक बताया। इस अवसर पर श्रमिक नेता वरूण तिवारी ने श्रमिकों के हितों के विपरीत बनाये गये नये कानून मजदूरों के संवैधानिक हितों की रक्षा करने में विफल रहा है। वर्तमान समय में बहुराष्ट्रीय कंपनी के द्वारा भारत में किए जा रहे व्यवसाय को लेकर कड़े कानून बनाये जाने की आवश्यकता है। वरिष्ठ पत्रकार रवि मुदिराज ने संविधान के प्रति लोगों की भावनाओं को लेकर जमीनी स्तर में समझ का उल्लेख करते हुए कहा कि लोग इसे कोर्ट कचहरी की विषय वस्तु मानते हैं जबकि मानव कल्याण के सर्वांगीण विकास के लिए उक्त संविधान का निर्माण हुआ है। आजादी के 75 वर्षो के पश्चात भी न तो देश के नागरिक, नेता एवं विद्यार्थी व ग्रामीण जनप्रतिनिधि नहीं समझते हैं इसका सदुपयोग। चलाक, चतुर अफसर अधिकारी और नेता ही संगठित होकर देश के संचालन व लूटपाट के लिए इसका सदुपयोग करते है। उक्त कार्यक्रम का संचालन करते हुए अमलेन्दु हाजरा ने अपने विचारव्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रधर्म का यह महाग्रंथ हिन्दु धर्म के लिए रामायण व गीता उसकी आत्मा है। मुस्लिम धर्म के लिए कुरान, ईसाईधर्म के लिए बाईबिल और सिक्ख धर्म के लिए गुरूग्रंथ साहेब अति सम्माननीय व पूज्यनीय है। हमें इन धर्म ग्रंथों में मानव कल्याणकारी शब्द दया, करूणा, त्याग, क्षमा, अहिंसा व दान आदि शब्दों को ढूंढना चाहिए इस अवसर पर निखिल मंगवानी, हरजीत सिंह भाटिया, एस.के. तिवारी, महेश देवांगन देगन,  राजू शर्मा आदि उपस्थित रहे।