त्वरित खबरें (राजनंदगॉव)। जिले के आला अधिकारी अपनी जेब भरने में व्यस्त होकर उद्योगपतियों को मजदूरों का शोषण करने एवं उनकी जान के साथ खिलवाड़ करने की पूरी छूट दे दी है। उद्योगों में न ही न्यूनतम मजदूरी का पालन हो रहा है और ना ही सुरक्षा उपायों का।
मामला है राजनांदगॉव जिले के तोरनकट्टा गॉव में संचालित ए.टी.प्लास्टिक इण्डस्टीज़ का। त्वरित खबरें की टीम जब वहॉ पहुॅची तो वहॉ देख कर ऐसा लगता ही नहीं था कि वहॉ कोई जहरीला उद्योग संचालित हो रहा है। ना ही कोई बोर्ड और ना ही कोई संकेत जो इसके अस्तित्व का संकेत देता। अत्र-तत्र सर्वत्र पुरानी सीमेंट बोरियों के टुकड़े नज़र आए जिन्हें पिघला कर प्लास्टिक की रस्सी का निर्माण किया जा रहा है। सड़ी सीमेंट की बोरी के टुकड़ों से उड़ने वाली गर्द एवं पिघलती प्लास्टिक से उठ रही केमिकल युक्त भाप के बीच श्रमिक बिना किसी सुरक्षा उपायों खुले चेहरे और खाली हाथ काम करते मिले। वहॉ पर ना तो आपातकालीन सुरक्षा उपकरण का पता था और ना ही एक्झास्ट फैन लगे थे।
वहॉ पर मैनेजर मिले उससे बात करने पर उन्होंनें बताया कि उक्त फैक्टरी राजनांदगॉव निवासी किसी जैन की है जो कि यहॉ अभी मौजूद नहीं है। यहॉ पर लगभग 25-30 श्रमिक कार्य कर रहें हैं जिन्हे 200 से 250 रूपये मजदूरी दी जाती है। किंतु कार्यरत श्रमिकों ने यह बताया कि हमें केवल 150 रू. ही मजदूरी दी जाती है। यहॉ पर श्रमिकों की सुरक्षा के लिए कोई भी सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। अगर कोई दुर्घटना हो जाए तो सब भगवान भरोसे ही है। पिघली हुई प्लास्टिक से निकलने वाली केमिकल युक्त भाप जो कि अति हानिकारक है, जिसके भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी दूरगामी दुष्परिणाम होंगें इससे भी सुरक्षा के लिए कोई भी व्यवस्था नही है कुल मिला कर कार्यरत श्रमिकों के जीवन के साथ खिलवाड़ ही किया जा रहा है। मैनेजर को यहॉ कार्य करते हुए लगभग 7 साल हो गए हैं और आज तक किसी भी अधिकारी ने इस फैक्टरी की जॉच करने के लिए नहीं आया।
कुल मिलाकर देखा जाए तो ऐसा प्रतित होता है कि वर्तमान सरकार ने अधिकारियों को लूट की पूरी छूट दे रखी है और उनकी इस कार्य में मौन स्वीकृति है, जो करना है करो बाकी सम्हालने के लिए तो हम बैठे ही है। ऐसा इसलिए भी लग रहा है कि जैन ने ये कहा जो छापना है छाप दो, बाकी हम देख लेंगें।
देखने वाली बात ये है कि जिले के आला अधिकारी इस मामले में कोई ठोस कार्यवाही करते हैं या फिर जॉच के नाम पर केवल लीपापोती कर मामले का पटाक्षेप कर शासन में बैठे मुखिया समेत उनके मंत्रियों की छवि में पलिता लगा कर उन्हें नेस्तानाबूद करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगें !
अधिकारियों पर कलेक्टर का कोई प्रशासनिक नियंत्रण नहीं !
जिस प्रकार यहॉ श्रम विभाग सहित औद्योगिक सुरक्षा अधिकारियों एवं उद्योग विभाग के अधिकारी की मनमानी चल रही है उसे देख कर ऐसा लगता है कि जिले के कलेक्टर में प्रशासनिक क्षमता की कमी है जिसके चलते अधिकारी अपने मनमर्जी काम कर रहे हैं और उद्योगपतियों को खूली छूट दे रखी है जैसा कमाना है कमाओ श्रमिको को शोषण जितना कर सको करो चाहो उनकी ज़िंदगी दॉव पर लग जाए।
एक उद्योग के नाम पर तीन उत्पादों का उत्पादन
टैक्स चोरी की संभावना
ए. टी. प्लास्टिक इण्ड. के नाम पर फैक्टरी में कोसो बाईक मोनो डोरी, शक्तिमान टेन डोरी सहित रेनबो पेपर प्लेट के उत्पादन का कार्य चल रहा है अब देखने वाली बात तो यह है कि उद्योग विभाग में यह इण्ड. किन उत्पादों के लिए रजिस्टर्ड है और इनके द्वारा किस किस का टैक्स भरा जा रहा है ? इसकी सूक्ष्मता से जॉच की जाए तो एक बड़ी टैक्स चोरी भी सामने आएगी।
श्रमिकों को बीमा पी.एफ.सहित अन्य सुविधाओं का लाभ नहीं
मिली जानकारी के अनुसार यहॉ कार्यरत श्रमिकों को केवल दैनिक मजदूरी 150 के हिसाब से भुगतान किया जाता है शासन द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी दर का पालन नही हो रहा है, साथ ही पीएफ भी नहीं काटा जा रहा है। बीमा सहित स्वास्थ्य सुविधाओं का भी लाभ श्रमिकों को नहीं दिया जा रहा है। साथ ही कार्यरत कर्मचारियों द्वारा यह कहा जा रहा है कि श्रमिकों को किए जा रहे भुगतान की जानकारी श्रम विभाग के अधिकारियों को भी है।