22 अगस्त 2018 को एक करोड़ के इनामी नक्सली पहाड़ सिंह ने भिलाई रेंज के तत्कालीन आईजी जीपी सिंह के समक्ष आत्मसमर्पण किया था ! इतने कुख्यात नक्सली के अचानक आत्मसमर्पण करने से जानकार तब बहुत हैरान थे ! इस दौरान यह चर्चा भी जोरों पर थी कि,पहाड़ सिंह नोटबंदी के दौरान नक्सलियों का करोड़ों रुपये लेकर फरार हो गया था । उस वक्तआईजी जीपी सिंह ने बताया था कि, आदिवासियों के साथ हो रहे नर संहार से पहाड़ सिंह काफी पीड़ित था. उन्होंने बताया कि नक्सली आदिवासियों पर कभी पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाकर तो कभी उनके आंदोलन में हिस्सा नहीं लेने पर उन्हें मौत के घाट उतार रहे हैं. इससे आहत होकर पहाड़ सिंह ने आत्मसमर्पण किया !
आज वही जीपी सिंह अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के पद में रहते एंटी करप्शन ब्यूरो के शिकंजे में फंसने के बाद राजद्रोह के तहत FIR दर्ज आरोपी बन्ना का निलंबित कर दिए गए हैं ! इतना ही नहीं बल्कि उनकी गिरफ्तारी चल रही है ! राष्ट्रबोध कि इस खबर को लिखे जाने तक वे गुमशुदा थे !
1 जुलाई को छापामार कार्रवाई के दौरान उनके सरकारी बंगले से कुछ चिटि्ठयां, फटे हुए पन्ने और पेन ड्राइव मिली थीं, जिसकी जांच में सरकार विरोधी गतिविधियों की बात सामने आई थी। इसी जांच के दायरे में एक करोड़ के इनामी नक्सली पहाड़ सिंह का आत्मसमर्पण के हालात पर भी अध्ययन होगा !
IPS जीपी सिंह भारतीय पुलिस सेवा के पहले अफसर हैं, जिन पर प्रदेश में राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। ACB ने सिंह के पुलिस लाइन स्थित सरकारी बंगले पर 1 जुलाई की सुबह 6 बजे छापा मारा था।
इसके साथ ही 15 अन्य ठिकानों पर भी एक साथ कार्रवाई की गई थी। करीब 68 घंटे से भी ज्यादा समय तक चली कार्रवाई के दौरान 10 करोड़ की अघोषित संपत्ति के साथ बंगले के पीछे गटर से कई डॉक्यूमेंट्स मिले थे। इन्हें ही राजद्रोह के लिए साक्ष्य माना गया है !
दो दिन दस्तावेजों का परीक्षण, फिर अफसरों के बयान लिए
डायरी के पन्नों और पेन ड्राइव से निकाले गए दस्तावेजों से सरकारी विरोधी गतिविधियों के संकेत मिले थे। ACB ने दस्तावेजों का ब्योरा तीन दिन पहले ही पुलिस को सौंप दिया था। पुलिस ने कार्रवाई के पहले करीब 2 दिनों तक इनका परीक्षण किया। उसके बाद छापेमारी में शामिल अफसरों का बयान लिया गया। उनके बयानों और दस्तावेजों के आधार पर मामला दर्ज किया गया।
चिटि्ठयों को सरकार के खिलाफ षड्यंत्र माना
जीपी सिंह के सरकारी बंगले और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान जो चिटि्ठयां और दस्तावेज मिले हैं, उनमें ऐसी बातें लिखी हुई हैं जो सरकार के खिलाफ साजिश की तरफ सीधा इशारा कर रही हैं। पत्र के अलावा डायरी के कुछ पन्ने ऐसे हैं, जिनमें कुछ लोगों को लेकर गंभीर आपत्तिजनक टिप्पणियां हैं, जिन्हें पुलिस यह मान कर चल रही है कि इनसे समाज में मौहाल बिगाड़ने का प्रयास भी किया गया।
धाराएं और सजा
धारा 124: लोकतांत्रिक सरकार के खिलाफ षड्यंत्र। गैरजमानती अपराध। सजा- 3 साल।
धारा 153: ऐसी गतिविधि जिससे समाज में वैमनस्यता फैले। जमानती अपराध। सजा- 6 महीने।
छत्तीसगढ़ पुलिस के इतने उच्च पद में बैठे हैं एक अधिकारी के विरुद्ध राजद्रोह जैसे संगीन आरोप राज्य सरकार की ओर से लगाए जाने पर अनेक तरह की चर्चाएं शुरू हो गई है ! आने वाले दिनों में इसे लेकर राजनीति भी होगी और कई चौंकाने वाली नई जानकारियां भी सामने आएगी !