बैगा ग्रुप की अनूठी पहल, छत्तीसगढ़ की संस्कृति व परंपरा को रखा जीवंत...

त्वरित ख़बरें -सत्यभामा दुर्गा रिपोर्टिंग

राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ की लोक कलाकारों और लोक संस्कृति को सजोए रखने में अपनी  अहम भूमिका निभाने वाली संस्कारधानी की संस्था बैगा ग्रुप राजनांदगांव द्वारा कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादसी 12 नवंबर मंगलवार को तुलसी विवाह के साथ ही पौराणिक व छत्तीसगढ़ की संस्कृति व मान्यताओं के अनुसार देवउठनी एकादसी के अवसर पर भूर्री जलाकर आने वाली ऋतु का स्वागत कल रात्रि में किया गया।बैगा ग्रुप द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया कि महुवा झरे, नई माने काली, हर हर भोला के साथ ही 40 से अधिक आडिओ और विडियो कैसेट सुवा, ददरिया, कर्मा, जस गीत एवं छत्तीसगढ़ी फिल्म जगत में मांग सजादे सजना के माध्यम से लोक संस्कृति व लोक कलाकारों को हमेशा आगे लाने वाली नगर की संस्था बैगा ग्रुप ने अपने 33 साल से भी अधिक समय से छत्तीसगढ़ की पौराणिक परंपरा देवउठनी एकादसी पर भगवान सालिगराम व तुलसी माता के विवाह पश्चात छत्तीसगढ़ की संस्कृति व मान्यता अनुसार भूर्री जलाने की प्रथा को इस बार भी आयोजित किया। इस बार 12 नवंबर मंगलवार को देवउठनी एकादशी के अवसर पर पुरानी टोकनी, सुपा, झवहा को एकत्रित कर बैगा ग्रुप ने अपने नियमित बैठक स्थल मानव मंदिर चौक सिनेमा लाईन मार्ग पर कल रात्रि में भूर्री प्रज्ज्वलित कर आने वाली ऋतु के आगमन का स्वागत किया। वहीं इस अवसर पर एक दूसरे को तुलसी विवाह व देवउठनी एकादसी की बधाई व शुभकामनाएं दी। एकादशी पर आयोजित भुर्री प्रज्ज्वलन के अवसर पर लोक कलाकारों व संस्कृति को संजोए रखने वाले बैगा ग्रुप के राजेश मारु के मार्गदर्शन में एवं गणेश प्रसाद शर्मा ‘गन्नू’, रचनाकार हर्ष कुमार बिंदू,  स्वरधारा के संयोजक विष्णु कश्यप, संगीतकार योगेश टुक्का, पंकज महेश्वरी, पंकज शर्मा, मनोज सेन के साथ ही अन्य सदस्यगण भी उपस्थित थे।