माइंस अलाउंस पुराने बेसिक के अनुसार मिलेगा कर्मियों ने कहा- यह बड़ा नुकसान, करेंगे विरोध

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नए वेतन समझौते से प्लांट के कर्मियों के साथ-साथ माइंस के कर्मियों में भी जबर्दस्त नाराजगी है। उनमें नाराजगी इस बात को लेकर है कि इस बार भी सेल प्रबंधन माइंस अलाउंस (डासा) नए वेतन के बेसिक के हिसाब से देने की बजाए पुराने बेसिक से ही देने का समझौता किया है। जिससे उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान होगा।

लिहाजा यूनियनें कर्मियों की नाराजगी को देखते हुए सेल प्रबंधन को आंदोलन की चेतावनी दी है। एनजेसीएस के माध्यम से सेल कर्मियों के लिए हुए वेतन समझौता के एमओयू को केन्द्रीय इस्पात मंत्रालय के अपर सचिव के अनुमोदन से सेल प्रबंधन द्वारा लागू कर दिया गया है।

एमओयू में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि डस्ट अलाउंस (डासा) की राशि पूर्व दर के हिसाब से 18 नवंबर से देय होगी। दासा का संविलियन पर्क्स के साथ नहीं किया गया है और बढ़े हुए वेतनमान के हिसाब से दासा के एरियर्स राशि का भुगतान भी खदान कर्मियों को 1 अप्रैल 2020 से होना चाहिए था, क्योंकि प्रबंधन अधिकारियों को पर्क्स के एरियर्स का हकदार मानते हुए उन्हें राशि एरियर्स के रूप दे सकता है तो फिर दासा की राशि का एरियर्स कर्मियों को क्यों नहीं दिया जा सकता है? इन्हीं सवालों का जवाब कर्मचारी प्रबंधन से मांग रहे हैं।

पिछली बार भी आंदोलन के बाद मिला भुगतान, एरियर्स भी मिला
पिछले वेतन समझौते के बाद भी एक तरफ जहां आरएमडी के खदानों में कर्मियों को शुरू से ही न केवल बढ़े हुए वेतनमान के आधार पर डासा राशि दी गई बल्कि उन्हें उसका एरियर्स भुगतान भी किया गया। जबकि बीएसपी में चार दिन के हड़ताल के बाद केवल बढ़े हुए वेतनमान के हिसाब से डासा राशि दी गई। जबकि उसके एरियर्स राशि भुगतान के लिए यूनियनों को वाद दायर करना पड़ा।
आंदोलन के बाद मिला था नया बेसिक अलाउंस

कर्मियों का कहना है कि प्रबंधन द्वारा पुराने बेसिक के 10% राशि के हिसाब से दासा की राशि आने वाले समय में देने का निर्णय प्रबंधन द्वारा लिया गया है जो कि पूर्ण रूप से अवैधानिक है व इसे लेकर पिछले वेतन समझौते के समय भी राजहरा खदान समूह में हड़ताल करना पड़ा था, जिससे कंपनी को भी नुकसान उठाना पड़ा। उस समय 4 दिन बाद प्रबंधन को नए बेसिक के हिसाब से अलाउंस का भुगतान करना पड़ा। इस बार भी संयुक्त खदान मजदूर संघ राजहरा के अध्यक्ष राजेंद्र बेहरा ने बताया कि यूनियन ने सेल प्रबंधन को पत्र भेज कर नए बेसिक से अलाउंस नहीं देने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

सीटू समझौते के खिलाफ कर चुका है आंदोलन, समझौता कर्मी हित में नहीं
वेतन समझौते के खिलाफ राजहरा में सीटू यूनियन पहले ही आंदोलन कर चुका है। सीटू का मानना है कि 1 जनवरी 2017 से पूरा एरियर्स, ग्रेज्युटी सीलिंग व ठेका श्रमिकों की वेतन बढ़ोतरी के मामले में प्रबंधन की स्पष्ट राय के बिना समझौता करना सेल कर्मचारियों के हित में नहीं होगा। कर्मचारियों को 40 माह के एरियर्स का लाखों रुपए नहीं मिल पाया। ओपेन एंडेड स्केल न होने से 3 प्रतिशत इंक्रीमेंट का पूरा लाभ भी नहीं मिला। कर्मचारियों को मिलने वाली सभी प्रकार की सब्सिडी भी बंद कर दी जा रही है। 13 प्रतिशत एमजीबी पर सहमति के बावजूद न्यूनतम 28 प्रतिशत पर्क्स भी नहीं मिला।

सीटू ने भी वेतन समझौते के विरोध में सेल प्रबंधन को पहले ही 16 दिसंबर को सभी इकाइयों में आंदोलन की चेतावनी दे चुका है। यूनियन का कहना है कि 26 नवंबर को प्रबंधन ने एक आदेश जारी कर कर्मचारियों की ग्रेच्युटी सीलिंग कर दी। जिससे कर्मचारियों को सेवानिवृत्त के समय 5 से 10 लाख रुपये का सीधा नुकसान होना तय है। इसी तरह प्रबंधन ने यूनियनों से चर्चा किए बगैर ही पेंशन अंशदान में बदलाव करने का आदेश भी जारी कर दिया है। राजहरा माइंस में भी कर्मी हड़ताल पर रहेंगे।